अवैध शराब की नई राजधानी, कोचियों का राज, देखिए विशेष रिपोर्ट

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अवैध शराब की नई राजधानी, कोचियों का राज, देखिए विशेष रिपोर्ट

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  • Publish Date - June 30, 2018 / 12:03 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:06 PM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जब शराब बेचने का फैसला किया तो ये दावा किया गया था कि कोचियों से मुक्ति दिलाने के लिए ये निर्णय लिया गया है। लेकिन आज कोचियाबंदी की हकीकत क्या है, क्या अब अवैध शराब के कारोबारी अपना धंधा समेट चुके हैं, या फिर अभी भी जारी है। इस पर पढ़िए/देखिए IBC24 की विशेष रिपोर्ट।

सरकार पर विश्वास करें तो अब कोई झोले में शराब नहीं बेचता। लेकिन दूसरी तरफ वो कौन लोग हैं जो लगातार अवैध शराब बिक्री की शिकायत कर रहे हैं। शासन-प्रशासन से कोचियो का कारोबार बंद कराने की गुहार लगा रहे हैं। सरकार के दावे और लोगों की शिकायत की हकीकत जानने के लिए IBC24 ने  बस्तर या सरगुजा जाने की बजाए देश के सबसे हाईटेक शहर नया रायपुर चुना। राजधानी का वो इलाका जहां से निकले मंत्रालय के आदेश पर पूरा राज्य चलता है। राजधानी का वो इलाका जहां मंत्रालय से निकले आदेश का पालन कराने वाली पुलिस का मुख्यालय भी है। दिन था 28 जून और जगह थी कयाबांधा।

हम नया रायपुर के कयाबांधा पहुंचे। अवैध शराब बिक्री की इस पड़ताल में IBC24 को पता चला कि यहां एक पुराना कोचिया रहता है। हमें लगा कि यहां से कुछ पता चलेगा, तो उसके पास गए। हमने उससे जैसे ही शराब की मांग की। कोचिए ने तुरंत इनकार कर दिया। उसने बताया कि कुछ दिन पहले तक वो शराब बेच रहा था, लेकिन अब वो नहीं बेच रहा है। सरकार के दावे पर कयाबांधा में विश्वास बढ़ गया। लेकिन थोड़ी सी बातचीत में ही पुराने कोचिए ने हमें मंत्रालय के पीछे एक गांव का पता दिया। और ये भी बताया कि जितनी शराब चाहिए मिल जाएगी।

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सरकार और इस पुराने कोचिए में से कौन सही है। इसकी पड़ताल अब और इंट्रेस्टिंग हो गई थी। भीतर से यही सोच रहे थे कि कोचिए की बात झूठी निकल जाए। लेकिन जब पलौद गांव पहुंचे तो नजारा ही अलग था। अभी हम सोच ही रहे थे कि किसी से कोचिए के बारे में पूछते। तब तक नजारा सामने था। ना कोई डर और ना शर्म। किसी से कोचिए का पता पूछने की जरूरत ही नहीं पड़ी। गांव के चौक पर शराब कोचियों का मेला लगा हुआ है। चौक पर बाइक खड़ी है, शराब का शौकीन बाइक के पास रूका। शराब उठाई और चलते बना।

शराब खरीदने और बेचने वालों का अंदाज ऐसा है जैसे कुछ हो नहीं रहा हो। लेकिन इसमें भी कई लेयर है। आपने देखा बाइक आई, रूकी, शराब लिया और चलते बना। वीडियो में पैसे का हिसाब तो दिखा ही नहीं। यही तो स्टाइल है। ज्यादा वक्त ना लगे, इसके लिए चिल्हर का हिसाब यहां पहले ही कर लिया गया है। यहां से सिर्फ सप्लाई होती है, शराब ली और चलते बने।

इन्हें प्रशासन का कितना डर है इसका नजारा तो आगे भी दिखाएंगे। लेकिन इतने बता देते हैं कि यहां पर कोचियों एक अपना नियम है। जगह बदलते रहते हैं। कभी 20 मीटर आगे तो कभी 20 मीटर पीछे।  हर 30 मिनट बाद ये कोचिया यहीं आसपास किसी दूसरे जगह पर खड़ा मिल जाएगा, ताकि शराब की सही सप्लाई हो सके। यहां शराब खरीदने के लिए अगर आप नहीं आना चाहते तो होम डिलिवरी की सुविधा भी है। गांव के कई बच्चे और नौजवान ये आपके घर लाकर पहुंचा देंगे। जेबों की क्षमता के हिसाब से 44 पौवे भरकर ये पार्सल एजेंट का काम करते हैं। गांव के शुरू से लेकर अंत तक शराबियों के एजेंट सक्रिय हैं। बाइक की डिक्की में शराब डालकर ये पलक झपकते ही नए ठिकाने पर डिलिवरी के लिए निकल पड़ते हैं।

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सिर्फ बच्चे और नौजवान ही नहीं कई बुजुर्ग महिलाएं भी इस काम को बखूबी अंजाम देती है। एक महिला दिखी जो, कितनी सफाई से बाइक सवार को शराब बेचकर आ गई। लेकिन जैसे ही हमने इस अवैध धंधे के बारे में पूछा तो देखिए कैसे सीधे मुकर गई। अब सवाल ये है कि इतने बड़े अवैध कारोबार को लीड कौन कर रहा है. कौन चलवा रहा है ये। इतना बड़ा नेटवर्क कहीं से तो संचालित होता होगा। कौन है पलौद में इस अवैध धंधे का बादशाह। हमें लीकर डॉन तक पहुंचने के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी।

इस पूरे इलाके के कोचिए की सरगना। नाम है शैला। हिम्मत इतनी कि हर सवाल का जवाब एकदम देसी कड़क अंदाज में, बिना लाग लपेट के। शैला का 15-16 लोगों का परिवार है। ज्यादातर बच्चे बाइक लेकर सुबह से शाम तक शराब बेचने का धंधा करते हैं। एक तरफ कोचियो पर पाबंदी के सरकारी दावे और दूसरी तरफ सीना ठोककर शराब बेचने का ऐलान करने वाली शैला। हकीकत सामने है। गांव का ये प्रवेश द्वार देखकर आपको पता चल जाएगा कि यहां पलौद में सरकार ने कोचियों को नहीं बल्कि कोचियों ने सरकार को जिलाबदर कर दिया है।

शराब का धंधा करने वाले लोग कच्ची शराब से लेकर सरकारी भट्ठियों में मिलने वाली शराब को पूरे दिन इकट्ठा करते हैं। शहर के लड़के बाइक पर सवार होकर अभनपुर और रायपुर की शराब दुकानों से कई किश्तों में शराब खरीदकर लाते हैं। सुबह सरकारी दुकान खुलने से पहले और रात को सरकारी दुकान बंद होने के बाद और ड्राई डे के दिन तो यहां मेला लगा रहता है। ऐसा नहीं है कि पूरा गांव यहां शराब बेचता है। शैला और इन जैसे शराब बेचने वालों से परेशान लोगों ने कई बार इसकी शिकायत भी की है।

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गांव के सरपंच से लेकर महिलाएं तक इस इलाके में शराबबंदी के लिए कोशिश कर चुके हैं। रैलियां निकाली। आंदोलन किया। पुलिस और आबकारी विभाग से शिकायत की, मगर हुआ कुछ नहीं। आखिर में ये बता दें कि ये स्थिति नया रायपुर से महज 4 किलोमीटर दूर की है। सरकार की नाक के नीचे अगर शराब की मंडी सज रही है तो प्रदेश के ​बाकी हिस्सों में हालात कैसे होंगे। सोचिए।

 

वेब डेस्क, IBC24