‘शराब’ पर सरकार की मंशा क्या? 3 महीने के लिए क्यों टली नई आबकारी नीति?

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'शराब' पर सरकार की मंशा क्या? 3 महीने के लिए क्यों टली नई आबकारी नीति?

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  • Publish Date - February 10, 2021 / 05:06 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:05 PM IST

भोपाल,मध्यप्रदेश। शराबबंदी और शराब बिक्री को लेकर विपक्ष बार-बार सरकार को घेरता रहा है।और फिलहाल ये मौका मौजूदा सरकार के फैसला ना कर पाने को लेकर उठ रहा है। पहले शराब की दुकाने बढ़ाने की राय।फिर शराबबंदी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के आंदोलन का ऐलान। इन दोनों के बीच सरकार ने प्रदेश में नई दुकानें खोलने और नई आबकारी नीति पर फैसला टालने का विचार शुरू कर दिया है।

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प्रदेश में नई आबकारी नीति 1 अप्रैल की बजाय अब 1 जुलाई से लागू हो सकती है। विपक्ष का आरोप है निकाय चुनाव को लेकर सरकार को डर रही है।तो प्रदेश सरकार के मंत्री कहते हैं कि।अभी फैसला नहीं हुआ।आखिर नई शराब नीति, दुकानों को बढ़ाने की मांग और शराब बंदी पर इतना कनफ्यूजन क्यों है।

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पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के शराबबंदी अभियान के ऐलान के बाद सरकार सोच समझकर कदम रख रही है। पहले नई शराब दुकानों को खोलने का प्रस्ताव खारिज किया।तो अब नई शराब नीति को 1 जुलाई तक पेंडिंग में डाल दिया है। तब तक प्रदेश में शराब दुकानों का संचालन पुराने ठेकेदार ही करेंगे। दरअसल उमा भारती 8 मार्च से प्रदेश में शराबबंदी अभियान शुरू करने जा रही है। ऐसे में यदि शराब से आय बढ़ाने की नीति लागू की जाती है तो बीजेपी में अंदरूनी तौर पर विवाद की स्थिति बनने के साथ विपक्ष को भी सीधे तौर पर हमला बोलने का मौका मिलेगा, लिहाजा शिवराज सरकार नई शराब नीति को निकाय चुनाव के बाद लागू करने पर विचार कर रही है। हालांकि मंत्री विश्वास सारंग ने कहा है कि इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है।

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आबकारी विभाग नई आबकारी नीति का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज चुका है। दरअसल हर साल 15 मार्च तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, ताकि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए शराब के ठेके 1 अप्रैल से शुरू हो सकें, लेकिन 2020-21 के लिए प्रस्ताव तैयार होने से पहले ही नई शराब दुकानों को लेकर विवाद शुरू हो गया। आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य सरकार आय बढ़ाने के लिए शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही थी, कि उमा भारती के तेवर के बाद उसे बैकफुट पर जाना पड़ा। नई शराब नीति को लेकर प्रदेश सरकार और बीजेपी के कई नेताओं के विरोधाभास बयान भी सामने आ चुके हैं, जिसे अब कांग्रेस राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गई है।

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जाहिर है उमा भारती सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक बयानबाजी के जरिये सीएम शिवराज सिंह चौहान को इस मुद्दे पर कई बार घेर चुकी हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने 4 फरवरी से रतलाम में नशाबंदी के खिलाफ अभियान चलाने की शुरुआत कर दी है, जानकारों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनाव से पहले उमा भारती के अभियान का असर बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है। नई शराब नीति को तीन महीने के लिए होल्ड करने की एक वजह ये भी मानी जा रही है।