Acting Headmaster Salary: कार्यवाहक प्रधानाचार्यों की बल्ले-बल्ले! बकाया वेतन पर HC का बड़ा फैसला, 3 साल की सीमा भी हटाई

Acting Headmaster Salary: कार्यवाहक प्रधानाचार्यों की बल्ले-बल्ले! बकाया वेतन पर HC का बड़ा फैसला, 3 साल की सीमा भी हटाई

Acting Headmaster Salary: कार्यवाहक प्रधानाचार्यों की बल्ले-बल्ले! बकाया वेतन पर HC का बड़ा फैसला, 3 साल की सीमा भी हटाई

Acting Headmaster Salary | Photo Credit: IBC24

Modified Date: September 23, 2026 / 08:37 am IST
Published Date: September 22, 2026 8:33 am IST
HIGHLIGHTS
  • इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला
  • शिक्षकों को मिलेगा पूरा वेतन
  • 3 साल की सीमा हटाई

लखनऊ: Acting Headmaster Salary इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि लंबे समय तक कार्यवाहक प्रधानाध्यापक के रूप में काम करने वाले सहायक अध्यापक उस तारीख से प्रधानाध्यापक के वेतन के हकदार हैं, जिस दिन से उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी।न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बकाया वेतन के भुगतान को रिट याचिका दायर करने से पहले की तीन साल की अवधि तक सीमित करने वाली पहले की रोक को भी हटा दिया।

HC ने दिया वेतन को लेकर बड़ा फैसला

Acting Headmaster Salary न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने पूनम रानी वर्षणी समेत 1,030 याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं के समूह का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि उनके संबंधित विद्यालयों में नियमित प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति नहीं की गई थी और वे अलग-अलग तारीखों से प्रधानाध्यापक के दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे, लेकिन उन्हें प्रधानाध्यापक का वेतन नहीं दिया जा रहा था।

3 साल की सीमा हटाई

उच्च न्यायालय ने अपने एक पुराने फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को प्रधानाध्यापक के समान वेतन पाने के अधिकार को मान्यता दी गई थी। हालांकि, उच्चतम न्यायालय के ‘भारत संघ बनाम तरसेम सिंह’ मामले के फैसले के आधार पर उस मामले में बकाया भुगतान को रिट याचिका दायर करने से पहले के तीन वर्षों तक सीमित कर दिया गया था।

HC ने साफ किया हक

पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने बाद में ‘माया बनर्जी बनाम भारत संघ’ मामले में इस मुद्दे पर विचार किया और कहा कि ‘एसके मस्तान बी’ मामले में दिए गए पहले के फैसले को देखते हुए ‘तरसेम सिंह’ मामले पर आधारित दृष्टिकोण कायम नहीं रखा जा सकता। उच्च न्यायालय ने कहा कि कार्यवाहक प्रधानाध्यापक के रूप में दी गई सेवाओं के लिए मिलने वाला वेतन एक मूल्यवान अधिकार है, जो संपत्ति के अधिकार के समान है। इसलिए याचिकाकर्ताओं के बकाया वेतन को तीन वर्षों तक सीमित करने का कोई आधार नहीं है।

इन्हें भी पढ़ें:-


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

IBC24 डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं, जहां मेरी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति सहित प्रमुख विषयों की खबरों की कवरेज और प्रस्तुति है। वर्ष 2016 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हूं और अब तक 10 वर्षों का अनुभव प्राप्त किया है। विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए न्यूज़ राइटिंग और डिजिटल टूल्स में दक्षता हासिल की है। मेरे लिए पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है—सटीक, तेज और असरदार जानकारी पाठकों तक पहुंचाना मेरा लक्ष्य है। बदलते डिजिटल दौर में खुद को लगातार अपडेट कर, कंटेंट की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।