बड़ौत में निकाह से पहले हलफनामा अनिवार्य, जमीअत और खिदमत सोसायटी ने नयी व्यवस्था लागू की

बड़ौत में निकाह से पहले हलफनामा अनिवार्य, जमीअत और खिदमत सोसायटी ने नयी व्यवस्था लागू की

बड़ौत में निकाह से पहले हलफनामा अनिवार्य, जमीअत और खिदमत सोसायटी ने नयी व्यवस्था लागू की
Modified Date: July 12, 2026 / 04:49 pm IST
Published Date: July 12, 2026 4:49 pm IST

बागपत, 12 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत में अब दूल्हा और दुल्हन पक्ष के लिए निकाह से पहले स्टाम्प पेपर पर वकील से तैयार कराया गया हलफनामा पेश करना अनिवार्य होगा। यह फैसला जमीअत उलमा-ए-हिंद और खिदमत सोसायटी की शुक्रवार को जामा मस्जिद में हुई बैठक में लिया गया, जिसकी जानकारी रविवार को सार्वजनिक की गई।

दीनी तालीमी बोर्ड, जमीअत उलमा-ए-हिंद के जिलाध्यक्ष मौलाना आरिफ-उल-हक ने बताया कि हलफनामे में घोषित करना होगा कि दूल्हा और दुल्हन दोनों बालिग हैं, उनकी वैवाहिक स्थिति, उम्र और अन्य जरूरी जानकारियां सही हैं तथा निकाह से जुड़ा कोई तथ्य छिपाया नहीं गया है।

मौलाना ने कहा कि हाल के समय में नाबालिगों के निकाह, पहले से शादीशुदा होने या लंबित कानूनी मामलों जैसी जानकारियां छिपाकर शाही कराने के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि विवाद होने पर निकाह पढ़ाने वाले इमामों को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

मौलाना ने बताया कि अगर हलफनामे में दी गई कोई जानकारी बाद में गलत पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की होगी।

जमीअत उलमा-ए-हिंद के शहर सदर मुफ्ती शाह आलम ने कहा कि इस व्यवस्था का मकसद निकाह प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और इमामों को अनावश्यक कानूनी विवादों से बचाना है।

खिदमत सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. इरफान मलिक ने लोगों से अपील की कि निकाह से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज और सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि भविष्य में विवाद और कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके।

भाषा

सं आनन्द पारुल

पारुल


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