अलीगढ़ नगर निगम ने एएमयू की 500 करोड़ रुपये कीमत की जमीन कब्जे में ली, विवाद गहराया

अलीगढ़ नगर निगम ने एएमयू की 500 करोड़ रुपये कीमत की जमीन कब्जे में ली, विवाद गहराया

अलीगढ़ नगर निगम ने एएमयू की 500 करोड़ रुपये कीमत की जमीन कब्जे में ली, विवाद गहराया
Modified Date: August 21, 2026 / 01:52 pm IST
Published Date: August 21, 2026 1:52 pm IST

अलीगढ़ (उप्र), 21 अगस्त (भाषा) अलीगढ़ नगर निगम ने लगभग 500 करोड़ रुपये की कीमत वाली 3.8 एकड़ से ज्यादा वह जमीन अपने कब्जे में ले ली है जिस पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) दावा करता है। निगम की इस कार्रवाई से दोनों पक्षों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है।

नगर निगम के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार शाम को उस जगह पर साइन बोर्ड लगाना और जमीन की घेराबंदी करना शुरू कर दिया। इसके बाद, कुलपति प्रो. नईमा खातून के नेतृत्व में एएमयू अधिकारियों की एक टीम स्थिति का जायज़ा लेने के लिए मौके पर पहुंची।

खातून ने इस कार्रवाई को ‘गैर-ज़रूरी और अस्वीकार्य कदम’ बताया और कहा कि विश्‍वविद्यालय इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगा। उन्होंने कहा, ‘यह उस जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करने जैसा है, जो जमीन कानूनी तौर पर देश के उच्च शिक्षा के एक ऐतिहासिक केंद्र की है। हमारे पास अपनी मिल्कियत साबित करने के लिए एक सदी से भी पुराने सभी कानूनी दस्तावेज़ मौजूद हैं।’

कुलपति ने विश्‍वविद्यालय को कोई नोटिस दिए बिना ज़मीन पर कब्ज़ा करने के नगर निगम के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में ज़मीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जा होता है, वहां भी अधिकारी कार्रवाई करने से पहले कब्जा करने वाले को नोटिस जारी करते हैं।

नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि नगर निगम के पास ऐसे रिकॉर्ड हैं जिनसे पता चलता है कि यह भूखंड पिछले 40 सालों से उनके पास है।

मीणा ने पत्रकारों से कहा, ‘हमारे रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले चालीस सालों से यह जमीन हमारी है।’ उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम जल्द ही इस ज़मीन पर अहम शहरी परियोजनाओं का निर्माण शुरू करने की योजना बना रहा है।

एएमयू के प्रॉक्टर नावेद खान ने कहा कि मालिकाना हक का विवाद 2023 से कोल के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) के पास लंबित है और विश्‍वविद्यालय ने सभी ज़रूरी दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं।

खान ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘यह मामला 2023 से स्थानीय एसडीएम के पास लंबित है और हमने यूनाइटेड प्रोविंस सरकार की 13 जून 1923 की आधिकारिक अधिसूचना (जब यह जमीन आधिकारिक तौर पर हमें आवंटित की गई थी) सहित सभी दस्तावेज़ और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड पेश कर दिए हैं।’

उन्होंने कहा कि जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के आधार पर उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही कोई शांतिपूर्ण समाधान निकल आएगा।

इस बीच, इस घटनाक्रम पर चर्चा करने के लिए एएमयू टीचर्स एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष तुफैल अहमद ने कहा कि विश्‍वविद्यालय समूह इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और न्याय के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘अगर जरूरत पड़ी तो हम ऊपरी अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे।’ एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी एक प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार से मालिकाना हक के विवाद की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।

भाषा सं आनन्द

मनीषा

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