ललित किशोर तिवारी को पार्षद के रूप में शपथ नहीं दिलाये जाने पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय का सख्त रूख

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ललित किशोर तिवारी को पार्षद के रूप में शपथ नहीं दिलाये जाने पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय का सख्त रूख

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  • Publish Date - May 13, 2026 / 11:14 PM IST,
    Updated On - May 13, 2026 / 11:14 PM IST

लखनऊ, 13 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार को एक बार फिर ललित किशोर तिवारी को शपथ दिलाने में विफलता पर कड़ा रुख अपनाया, जिन्हें लगभग पांच महीने पहले एक चुनाव न्यायाधिकरण द्वारा राज्य की राजधानी लखनऊ में वार्ड संख्या 73, फैजुल्लागंज से पार्षद के रूप में निर्वाचित घोषित किया गया था।

बुधवार को महापौर और जिलाधिकारी की पेशी के लिए छूट मांगी गई। अदालत ने निर्देश दिया कि शपथ एक सप्ताह के भीतर दिलाई जाए, ऐसा न करने पर महापौर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त 21 मई को सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे।

यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने ललित किशोर तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित दिया।

इससे पहले 11 मई के अपने आदेश में अदालत ने कहा था कि अगर बुधवार तक शपथ नहीं दिलाई गई तो महापौर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को पेश होकर देरी के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।

बुधवार को सुनवाई के दौरान महापौर की ओर से छूट की अर्जी दाखिल की गई, जबकि जिलाधिकारी ने छुट्टी का हवाला देते हुए छूट मांगी। हालाकि, नगर आयुक्त अदालत के समक्ष उपस्थित हुए।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया पेश हुए, जबकि महापौर और नगर आयुक्त की ओर से अधिवक्ता एसएस चौहान ने पैरवी की।

हालांकि, वे चुनाव न्यायाधिकरण के आदेश का अनुपालन न करने के लिए कोई ठोस औचित्य प्रदान करने में विफल रहे।

अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए दोहराया कि न्यायाधिकरण के आदेश के अनुपालन में नवनिर्वाचित पार्षद को शपथ दिलाई जानी चाहिए, ऐसा न करने पर देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा।

भाषा सं जफर राजकुमार

राजकुमार