हाथरस की एक अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत खारिज की

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हाथरस की एक अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत खारिज की

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  • Publish Date - May 13, 2026 / 11:04 PM IST,
    Updated On - May 13, 2026 / 11:04 PM IST

हाथरस (यूपी), 13 मई (भाषा) उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक सांसद-विधायक अदालत ने बरी हुए तीन व्यक्तियों को कथित रूप से ‘‘आरोपी’’ कहने को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर की गयी मानहानि की शिकायत को खारिज कर दिया।

अतिरिक्त दीवानी न्यायाधीश दीपक नाथ सरस्वती ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 226 के तहत इस याचिका को खारिज कर दिया।

बीएनएसएस की धारा 226 मजिस्ट्रेट को यह अधिकार देती है कि यदि शिकायतकर्ता और गवाहों को परखने और धारा 225 के तहत किसी भी पूछताछ या छानबीन पर विचार करने के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं, तो वह शिकायत को खारिज कर सकता है।

अदालत ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि किसी को समन करने से पहले मजिस्ट्रेट को अपने ‘न्यायिक विवेक’ का इस्तेमाल करना चाहिए।

न्यायाधीश ने कहा,‘‘आपराधिक मामले में आरोपी को समन जारी करना एक गंभीर मामला है। आपराधिक कानून को यूं ही लागू नहीं किया जा सकता। ऐसा नहीं है कि शिकायतकर्ता आरोपों के समर्थन में केवल दो गवाह पेश कर दे और कानून तुरंत लागू हो जाए।’’

अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश में यह दर्शाया जाना चाहिए कि आरोपी को पेश करने का निर्णय लेने से पहले मामले के तथ्यों और लागू कानूनों पर सावधानीपूर्वक विचार किया गया है।

प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद, अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि गांधी द्वारा दिए गए विवादित बयान व्यक्तिगत हमले के बजाय सरकारी नीतियों और घोषणाओं की आलोचना करने के उद्देश्य से थे।

अदालत ने फैसला सुनाया कि शिकायत पर आगे बढ़ने या रायबरेली सांसद को तलब करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, परिणामस्वरूप, शिकायत खारिज की जाती है।

वकील मुन्ना सिंह पुंधीर ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी के खिलाफ रवि, राम कुमार उर्फ ​​रामू और लवकुश की ओर से तीन मामले दर्ज किए गए थे, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर 12 दिसंबर, 2024 को बुलगाढ़ी गांव में कहा था कि ‘आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित का परिवार घर के अंदर बंद है।’’

पुंधीर ने कहा कि यह बयान मानहानिकारक था।

उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी को 1.5 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया था, जिसमें तीनों के लिए 50 लाख रुपये प्रत्येक की मांग की गई थी।’’

सितंबर 2020 में एक गांव की दलित लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार हुआ था। कुछ दिनों बाद दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके गांव के चार लोगों पर इस अपराध का आरोप लगाया गया था। सीबीआई की जांच और मुकदमे के बाद, उनमें से तीन – रामकुमार, लवकुश और रवि – को बरी कर दिया गया, जबकि संदीप को दोषी पाया गया और वह अभी जेल में है।

भाषा जफर

राजकुमार प्रशांत

प्रशांत