राम मंदिर में चढ़ावा ‘चोरी’ : 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंप सकती है एसआईटी
राम मंदिर में चढ़ावा ‘चोरी’ : 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंप सकती है एसआईटी
लखनऊ, 16 जुलाई (भाषा) अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले की पड़ताल कर रहा विशेष जांच दल (एसआईटी) अगले 24 घंटे के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप सकता है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर मंदिर के प्रशासन और चढ़ावे की गणना प्रणाली में व्यापक बदलाव किए जा सकते हैं।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।
जांच पूरी करने के लिए एसआईटी को शुरू में 15 दिन का समय दिया गया था। हालांकि, बाद में एक जुलाई को इसका कार्यकाल 15 दिन के लिए बढ़ा दिया गया।
मामले से वाकिफ एक सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हमें उम्मीद है कि रिपोर्ट जल्द मिल जाएगी। यह आज शाम तक या अधिकतम अगले 24 घंटे में सरकार को सौंप दी जाएगी।”
सूत्र ने संकेत दिया कि एसआईटी के कार्यकाल में एक और विस्तार होने की संभावना नहीं है।
अंतिम रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उसमें की गई सिफारिशों पर मंदिर ट्रस्ट विस्तार से विचार करेगा। माना जा रहा है कि इन्हीं के आधार पर मंदिर के प्रबंधन और दान की गणना एवं प्रबंधन प्रणाली में बड़े सुधार किए जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार भी एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मौर्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “अन्य लोगों की तरह हम भी एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। धैर्य रखें और भरोसा करें, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे हनुमान जी की गदा का सामना करना पड़ेगा।”
ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को अयोध्या में प्रस्तावित है।
रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर ट्रस्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हां, इसका इंतजार है। पहले इसे सरकार के पास आने दीजिए।”
एसआईटी ने 23 जून को सरकार को नौ पन्नों की अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद मामले में कई अहम कार्रवाई हुईं, जिनमें प्राथमिकी दर्ज होना, मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे शामिल हैं।
ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने एक पत्र में कहा था कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वह इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे। उन्होंने पत्र में सवाल उठाया था कि एसआईटी की गोपनीय प्रारंभिक रिपोर्ट सार्वजनिक कैसे हुई।
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में भी है।
शीर्ष अदालत ने 13 जुलाई को मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया था। न्यायालय ने साथ ही एसआईटी को जांच की वस्तुस्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने 14 जुलाई को पुणे में कहा था कि उन्हें एसआईटी जांच और मामले पर उच्चतम न्यायालय की नजर, दोनों पर भरोसा है।
उन्होंने कहा था कि ट्रस्ट जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगा और दोषी पाए जाने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
गिरि ने कहा था कि एसआईटी की जांच पूरी होने तक ट्रस्ट इस विवाद पर कोई श्वेत-पत्र जारी नहीं करेगा।
हालांकि, विपक्ष ने जांच के नतीजों पर संदेह जताया है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि जांच में अब तक सिर्फ निचले स्तर के आरोपियों को ही निशाना बनाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
राय ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “सिर्फ छोटी मछलियां ही पकड़ी गई हैं। बड़ी मछलियों का क्या? शुरुआती रिपोर्ट की तरह यह भी सिर्फ दिखावा है।”
उन्होंने एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद इस्तीफा देने वाले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का कथित मामला पिछले महीने सामने आया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की थी। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के बाद आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
भाषा
सलीम पारुल
पारुल

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