Ram Mandir Donation Controversy: कहां गायब हो गया चांदी का कौवा? राम मंदिर में दान की गई भेंट पर उठे सवाल, इस दानदाता के दावे ने बढ़ा दी हलचल!

Ads

Ram Mandir Donation Controversy: कहा गायब हो गया चांदी का कौवा? राम मंदिर में दान की गई भेंट पर उठे सवाल, इस दानदाता के दावे ने बढ़ा दी हलचल!

  •  
  • Publish Date - June 24, 2026 / 03:03 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 04:10 PM IST

Ram Mandir Donation Controversy | Photo Credit: AI

HIGHLIGHTS
  • चांदी की प्रतिमा दान, श्रद्धालु ने मंदिर को सौंपी
  • अब तक कोई प्रमाण पत्र नहीं मिला
  • दान का उपयोग कहाँ हुआ, इस पर सवाल

अयोध्या: Ram Mandir Donation Controversy उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे (Ram Mandir Donation) को लगातार विवाद बढ़ता ही जा रहा है। चढ़ावा चोरी प्रकरण को छह दिनों तक खंगालने के बाद विशेष जांच दल (एसआइटी) ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी। इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है, लेकिन आए दिन इस मामले में नए नए खुलासे हो रहे हैं। इसी बीच एक बार फिर चढ़ावा को लेकर बड़ा दावा किया गया है।

चांदी के काकभुशुंडि दान को लेकर उठे सवाल

Ram Mandir Donation Controversy दरअसल, दानदाता अनीता भारद्वाज ने दावा किया है कि उन्होंने राम मंदिर परिसर में चांदी से निर्मित काकभुशुंडि प्रतिमा दान स्वरूप सौंपी थी, लेकिन उन्हें अब तक उसकी कोई आधिकारिक रसीद या फोटो उपलब्ध नहीं कराई गई है। अनीता के अनुसार, तस्वीर में जो चांदी का कौवा (काकभुशुंडि) देख रहे हैं, वह अनीता भारद्वाज ने चंपत राय को (Kakbhushundi Donation Ram Mandir) दिया था, ताकि राम मंदिर दरबार में इन्हें रखा जा सके। अब अनीता जी पूछ रही हैं यह दान कहाँ गया? कोई रसीद भी नहीं मिली थी। काकभुशुंडी को राम भक्त के रूप में चित्रित किया गया है, जो कौवे के रूप में गरुड़ को रामायण की कथा सुनाते हैं।

श्रद्धालु की ओर से किए गए दावे के बाद यह मामला धार्मिक और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ी बहस का विषय बन गया है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या आधिकारिक दस्तावेज से इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।

कैसल्स ग्रुप ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष ने मांगा जवाब

आपको बता दें कि इससे पहले कैसल्स ग्रुप ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. राजू वी मनवानी ने कहा कि, “पूरे सिंधी समुदाय की ओर से, एक किलोग्राम वजन की 200 चांदी की ईंटें बनाई गईं (Sindhi Community Ram Mandir) और 26 जनवरी, 2021 को राम मंदिर के लिए अयोध्या में चंपत राय को सौंपी गईं। हमें उस समय कोई रसीद नहीं मिली; उन्होंने कहा कि वे पहले जांच करेंगे और तय करेंगे कि इसका उपयोग कहां और कैसे करना है, और फिर हमें सूचित करें।”

“हमने कभी गंभीरता से सवाल नहीं किया कि क्या हालाँकि, समाचार देखने के बाद हमें चिंता होने लगी – क्या हमारी चाँदी गलत जगह पर पहुँच गई? इसीलिए हमने रसीद और जानकारी माँगी कि चाँदी का उपयोग कहाँ किया गया था। अगर मंदिर के लिए दान किया गया दान कहीं और ले जाया जाता है, तो यह भविष्य के दानदाताओं को प्रभावित करता है। जिस समय हमने दान किया था, उस समय चाँदी की कीमत लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये थी, आज इसका मूल्य 6 से 7 रुपये है; लोगों को निश्चित रूप से उनके द्वारा दिए गए दान के बारे में पूछने का अधिकार है। चूंकि मोदी और योगी के नेतृत्व में कुछ भी असंभव नहीं है, अगर एसआईटी का गठन किया गया है, तो कम से कम इस शक्ति का दुरुपयोग करने वाले दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:-

काकभुशुंडी कौन हैं?

रामायण में कौवे के रूप में गरुड़ को कथा सुनाने वाले राम भक्त।

दान किसने किया था?

श्रद्धालु अनीता भारद्वाज ने।

दान कब और किसे दिया गया था?

चंपत राय को, लेकिन रसीद नहीं मिली।