आजमगढ़ हत्याकांड : घायल बच्चे की भी मौत

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आजमगढ़ हत्याकांड : घायल बच्चे की भी मौत

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  • Publish Date - September 24, 2026 / 08:16 PM IST,
    Updated On - September 24, 2026 / 08:16 PM IST

आजमगढ़ (उप्र), 24 सितंबर (भाषा) आजमगढ़ में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कथित तौर पर पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या करने वाले व्यक्ति के छह वर्षीय घायल बेटे की भी उपचार के दौरान मौत हो गयी है। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि घटना में घायल उसकी दो बेटियों को बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार मृत बच्चे की पहचान शौर्य सिंह के रूप में हुई है, जो अपने पिता अरविंद सिंह द्वारा कथित तौर पर गोली चलाए जाने से घायल हो गया था।

उन्होंने बताया कि अरविंद ने मंगलवार शाम से बुधवार तड़के तक आजमगढ़ के शंभूपुर गांव स्थित अपने घर के एक कमरे में तीनों बच्चों को कथित रूप से बंधक बनाकर रखा था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनिल कुमार ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं को बताया, ‘‘शौर्य को आजमगढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बुधवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।’’

उन्होंने बताया कि अरविंद की पांच वर्षीय बेटी परी और सात माह की बेटी शांभवी को भी घटना के बाद मानसिक आघात के कारण जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था और दोनों को बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी एवं पुलिस उन्हें घर लेकर गयी।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक गत मंगलवार शाम अरविंद जब घर लौटा तो वहां धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। परिवार के लोगों के अनुसार घर में कथित तौर पर भूत-प्रेत या किसी अन्य अलौकिक प्रभाव की आशंका के चलते यह अनुष्ठान कराया जा रहा था।

सूत्रों ने बताया कि अनुष्ठान में अरविंद की 32 वर्षीय पत्नी बबीता सिंह और दो पुजारियों– महेंद्र पाठक (60) तथा अखिलेश मिश्रा (55) शामिल थे।

पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने पुरोहितों से सवाल-जवाब किए और उनके आधार कार्ड मांगे और उसके बाद उसने अपने लाइसेंसी पिस्तौल से बबीता, पाठक और मिश्रा को गोली मार दी जिससे उनकी मौत हो गई।

सूत्रों ने बताया कि घटना के बाद अरविंद तीनों बच्चों को लेकर एक कमरे में बंद हो गया और कथित तौर पर उन्हें जान से मारने की धमकी देने लगा।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने आठ थानों की टीम को मौके पर तैनात कर घर को घेर लिया और वरिष्ठ पुलिस ने कई घंटे तक उसे समझाकर आत्मसमर्पण के लिए मनाने का प्रयास किया।

सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने उसके रिश्तेदारों को भी मौके पर बुलाया ताकि वे उससे बात कर सकें, लेकिन वह कमरे से बाहर आने के लिए तैयार नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि घटना के दौरान अरविंद की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लग रही थी।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक करीब सात घंटे तक चले गतिरोध के बाद रात करीब 12 बजकर 20 मिनट पर आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की टीम को मौके पर बुलाया गया और अरविंद ने सुबह एटीएस से बात करने का संकेत दिया, लेकिन वह बच्चों के साथ कमरे के अंदर ही रहा।

सूत्रों ने बताया कि हालात अचानक तब गंभीर हो गए जब पुलिस ने कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनी जिसके बाद पुलिस के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़ने से पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और उसके बाद एसएसपी और विशेष कार्य बल (एसओजी) के जवान कमरे में दाखिल हुए।

पुलिस के अनुसार, अरविंद ने पुलिस टीम पर कथित तौर पर पांच गोलियां चलाईं, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें अरविंद घायल हो गया और बुधवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी।

पुलिस घटना के कारणों और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

भाषा सं. सलीम राजकुमार

राजकुमार