बांकेबिहारी मंदिर: भेंट की गई चीजों का उत्सवों में उपयोग न किए जाने पर उठे सवाल, जांच समिति गठित

बांकेबिहारी मंदिर: भेंट की गई चीजों का उत्सवों में उपयोग न किए जाने पर उठे सवाल, जांच समिति गठित

बांकेबिहारी मंदिर: भेंट की गई चीजों का उत्सवों में उपयोग न किए जाने पर उठे सवाल, जांच समिति गठित
Modified Date: September 9, 2026 / 06:21 pm IST
Published Date: September 9, 2026 6:21 pm IST

मथुरा (उप्र), नौ सितम्बर (भाषा) मथुरा में वृन्दावन स्थित ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के विशेष उत्सव एवं पर्वों पर ठाकुरजी को भेंट किए गए सोने-चांदी आदि बहुमूल्य रत्न जड़े झूले, रथ एवं विभिन्न प्रकार के सिंहासन आदि सामग्री का सेवा में उपयोग न किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। यह जानकारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति से मिली।

यह सवाल भी उठा कि उक्त सामग्री आखिर कहां है और संबंधित सेवायतों ने उनका उपयोग क्यों नहीं किया।

मंदिर की उच्चाधिकारी प्राप्त समिति ने मंगलवार शाम आयोजित बैठक में इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष एवं नगर आयुक्त की त्रिसदस्यीय समिति गठित की।

बैठक की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एवं समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने की।

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने वृन्दावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप देने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था।

यह समिति तब से श्रद्धालुओं की सुविधा एवं मंदिर की कुशल व्यवस्था के लिए समय-समय पर बैठक करके आपसी मंत्रणा के आधार पर निर्णय लेती रहती है। मंगलवार को इस समिति की 19वीं बैठक सम्पन्न हुई।

जिला सूचना कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में ठाकुरजी को भेंट किए गए श्रृंगार के अनेक बहुमूल्य रत्नों, सोने व चांदी से निर्मित झूले, रथ, नौका एवं विभिन्न प्रकार के सिंहासन मंदिर परंपरा के अनुसार विशिष्ट उत्सवों के दौरान सेवा में प्रयोग नहीं किए जाने पर सवाल उठे। यह सवाल उठा कि आखिर उक्त सामग्री का प्रदर्शन उनके समयानुसार क्यों नहीं कराया गया और वे सब सामान कहां हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार वृन्दावन के लक्ष्मण शहीद स्मारक में हुई बैठक की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने की। विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में मंदिर प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं एवं अन्य आधा दर्जन विषयों पर चर्चा हुई।

विज्ञप्ति के अनुसार चढ़ावे की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। बताया गया कि कुछ भण्डारी एवं अन्य लोग श्रद्धालुओं के हाथ से चढ़ावा ले रहे थे। विज्ञप्ति के अनुसार इस व्यवस्था को लेकर उच्चतम न्यायालय के आदेश और मंदिर की गरिमा के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में यह भी कहा गया कि मंदिर की व्यवस्थाओं में भण्डारियों की निर्धारित संख्या और प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। श्रद्धालुओं का चढ़ावा मंदिर के खजाने में ही जाना चाहिए। विज्ञप्ति के अनुसार सेवायतों से भगवान के श्रृंगार और सेवा को परंपरा के अनुरूप भव्य बनाए रखने की अपेक्षा की गई।

विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता और वितरण के तरीके को लेकर भी सवाल उठे।

विज्ञप्ति के अनुसार अध्यक्ष ने बताया कि यह निर्णय लिया गया है कि मंदिर में ठाकुरजी की ओर पेड़े ओर मालाएं फेंकी नहीं जाएंगी।

विज्ञप्ति के अनुसार समिति की ओर से प्रसाद को श्रद्धालुओं तक सम्मानजनक और व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया गया। विज्ञप्ति के अनुसार मंदिर में फूलों की सजावट को लेकर भी नई व्यवस्था पर विचार किया गया लेकिन इस पर सेवायतों ने इन्कार कर दिया। विज्ञप्ति के अनुसार मंदिर की बैंकिंग व्यवस्था भी बैठक में चर्चा का अहम विषय रही।

विज्ञप्ति के अनुसार सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि सेवायत सदस्यों ने कहा कि समिति की पिछली बैठक में निजी बैंकों को फण्ड नहीं देने के निर्देश के बावजूद निजी बैंक में फण्ड जमा किया जा रहा है।

विज्ञप्ति के अनुसार इस पर सेवायत सदस्यों ने संबंधित दस्तावेज और कागजात मांगे हैं। विज्ञप्ति के अनुसार साथ ही, समिति द्वारा कार्यभार संभालने के बाद से बैंकों ने मंदिर और श्रद्धालुओं के हित में कौन-कौन से कार्य किए तथा उन पर कितना खर्च हुआ, इसका भी विवरण मांगा गया।

भाषा सं जफर अमित

अमित


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