वाराणसी (उप्र), नौ सितंबर (भाषा) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को दावा किया कि उनकी सरकार ने देश के समक्ष आंगनवाड़ी केंद्रों का एक नया मॉडल पेश किया है और पिछले साढ़े नौ साल के दौरान राज्य में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को एक नया स्वरूप दिया गया है।
आदित्यनाथ ने नौवें पोषण माह कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए अपने संबोधन में कहा कि उनके 2017 में राज्य का मुख्यमंत्री बनने से पहले ज्यादातर आंगनवाड़ी केंद्रों की हालत खस्ताहाल थी।
उन्होंने कहा, ”आंगनवाड़ी केंद्रों में कोई व्यवस्था नहीं थी। गलती कोई और करता था लेकिन गाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को सुननी पड़ती थी। लखनऊ में बैठकर गलती कोई और करता था, लेकिन आपके हिस्से गालियां आती थीं। गाली सुनने के साथ-साथ थोड़ा मानदेय ही बढ़ा देते तो यह होता कि कुछ तो हो रहा है लेकिन उन्हें मानदेय भी नहीं मिलता था।”
आदित्यनाथ ने दावा किया कि उनके शासन की बागडोर संभालने के बाद प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों की हालत सुधारने की मुहिम शुरू की गयी।
उन्होंने कहा, ”पहली बार हुआ है कि अब आंगनवाड़ी केंद्र देखने लायक बन चुके हैं और हमने देश को एक मॉडल दिया है कि आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे होने चाहिए। हम एक आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण में 30 लाख रुपए खर्च कर रहे हैं और उनका पुनरुद्धार कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ साल में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को एक नया स्वरूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज आंगनबाड़ी बहनों के पास स्मार्टफोन है, उसी से वह ‘रियल टाइम’ डाटा अपलोड कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय को लगातार बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक लंबे समय तक इन कार्यकर्ताओं का मानदेय मात्र तीन हजार रुपये प्रतिमाह रहा लेकन उनकी सरकार ने पिछले साढे नौ साल में इसे चार गुना बढ़ाकर 12 हजार रुपये महीना किया है। साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके परिवार को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर भी दिया गया है।
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि 2014 से पहले ऐसी व्यवस्था शासन के एजेंडे का हिस्सा क्यों नहीं थी।
मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि बड़ी-बड़ी घोषणाएं किये जाने के बावजूद गरीबों, कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए सरकार का दृष्टिकोण क्यों धरातल पर नहीं उतर पाया था?
राष्ट्रीय पोषण माह हर साल सितंबर में समुदायों को एकजुट करने और गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों, किशोरों और उनके परिवारों के बीच पोषण और स्वास्थ्य देखभाल के व्यवहार को सुदृढ़ करने के लिए मनाया जाता है।
भाषा
सलीम सुभाष
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