लखनऊ, 26 जून (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को दावा किया कि अयोध्या ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए ‘लंका’ साबित होगी और ‘दानभक्तों’ का मुखौटा अब उतर चुका है।
राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में मिली नकदी और कीमती सामान के कथित गबन के मामले का संदर्भ देते हुए यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर हिंदी में एक पोस्ट में लिखा, ‘‘भाजपा का लंका-कांड अयोध्या में ही होगा। इन ‘दानभक्तों’ का मुखौटा उतर गया है, क्योंकि प्रभु की अलौकिक शक्ति ने अपना चमत्कार दिखा दिया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अब भाजपा के अहंकार की स्वर्णिम लंका और उसके ‘लंकाधिपति’ दोनों का अंत तय है।’’
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा पहले दावा करती थी कि उसके पदाधिकारी इस्तीफा नहीं देते, लेकिन अब उनके इस्तीफों को ‘त्यागपत्र’ कहा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह तो अभी शुरुआत है और आगे पार्टी के भीतर आपसी संघर्ष देखने को मिलेगा।
यादव ने आरोप लगाया, ‘‘दरअसल अभी तो ‘भाजपाई और उनके संगी-साथियों’ के काले कारनामों, करतूतों और कारगुजारियों का ये प्रथम अध्याय खुला है। बंटवारे की इस लड़ाई में अब इनकी ‘पार्टी, संघ, सभा, परिषद, वाहिनी और ट्रस्ट की टोली’ एक-दूसरे की पोल खोलेगी, इससे पहले कि ये लोग चोरी के माल से भरा अपना ‘झोला-बोरा’ लेकर इधर-उधर भागें सीमाएं सील कर देनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि भगवान के ऑडिट से ‘भाजपाई-गिरोह’ बच नहीं पाएगा।
यादव ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘नीट के छात्र कह रहे हैं कि जब इस्तीफों का दौर शुरू हो ही गया है तो ‘लीकाधिपति’ को भी इस्तीफा देना चाहिए।’’
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘‘गणित पढ़ने का क्या फायदा, जब गिनती ही गड़बड़ हो। सोना-चांदी कम तौला जाए और आभूषण चोरी हो जाएं।’’
राम मंदिर से जुड़े कथित गबन के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल ‘‘दीये तले अंधेरा’’ नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के घोर अंधकार से भरी खाई है।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि भव्य मंदिर में हुई कथित चोरी एक दिन सामने आएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इतिहास में 17 बार लूट करने वाले सदियों तक बदनाम रहे। लेकिन जिन्होंने केवल 40 दिनों में 70 बार कथित लूट की, उनका नाम इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज होगा।’’
यादव ने कहा, ‘‘जरा सोचिए, जिन्होंने केवल सात सप्ताह में इतनी बड़ी कथित चोरी की, उन्होंने इतने वर्षों में कितना लूटा होगा। आपस में कितना बांटा, कितना छिपाया और कितना अपने सरगना तक पहुंचाया। यह पूरी तरह निंदनीय है।’’
भाषा
जफर रवि कांत