डब्ल्यूएफआई चुनाव में दीपेंद्र की हार के बाद हुड्डा परिवार ने रची मेरे खिलाफ साजिश: बृजभूषण

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डब्ल्यूएफआई चुनाव में दीपेंद्र की हार के बाद हुड्डा परिवार ने रची मेरे खिलाफ साजिश: बृजभूषण

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  • Publish Date - August 10, 2026 / 03:05 PM IST,
    Updated On - August 10, 2026 / 03:05 PM IST

गोंडा (उप्र), 10 अगस्त (भाषा) भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सोमवार को दावा किया कि हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को कुश्ती संघ के चुनाव में हराने के बाद उनके खिलाफ “साजिश” रची जाने लगी थी और बाद में इसी परिवार के दबाव में कुछ महिला पहलवान उनके खिलाफ बोलने के लिए तैयार हुईं।

दिल्ली की एक अदालत ने पिछले हफ्ते सबूतों की कमी का हवाला देते हुए, डब्ल्यूएफआई के पूर्व प्रमुख सिंह को यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया। यह मामला छह महिला पहलवानों ने दर्ज कराया था, जिनमें वर्ल्ड चैंपियनशिप की पदक विजेता विनेश फोगाट भी शामिल थीं।

सिंह ने जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर विश्नोहरपुर स्थित अपने आवास पर संवाददाताओं से बातचीत में हरियाणा की महादेव रेसलिंग एकेडमी और हुड्डा परिवार को लेकर आरोप लगाए।

उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में कई अखाड़े और कुश्ती अकादमियां हैं, लेकिन महादेव रेसलिंग एकेडमी एक परिवार और एक अखाड़े से जुड़ी है तथा इसे स्थापित करने और मदद करने में भूपेंद्र हुड्डा की भूमिका रही है।

सिंह ने कहा कि अदालत का ‘एक परिवार, एक अखाड़ा’ संबंधी निष्कर्ष उनके बयान के आधार पर नहीं, बल्कि दो पीड़ित लड़कियों द्वारा न्यायाधीश के कक्ष में दिए गए बयानों के आधार पर आया है।

उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से उन्हें खुशी है क्योंकि उनके अनुसार उन्होंने शुरुआत से जो बातें कही थीं, वही न्यायिक रिकॉर्ड में सामने आई हैं।

पूर्व सांसद ने पहलवानों की गवाही और अलग-अलग स्तर पर दिए गए बयानों में कथित विरोधाभास का मुद्दा भी उठाया।

सिंह ने दावा किया कि निगरानी समिति के समक्ष दिए गए बयान, शपथ पत्र और अदालत में हुई गवाही में अंतर था। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ पहलवान हिसार और रोहतक के थे, लेकिन सभी का पता बजरंग पूनिया के नाम से दिया गया था।

सिंह ने दावा किया कि जिन घटनाओं को लेकर उन पर आरोप लगाए गए, उनके बताये गए समय पर वह पहलवानों के साथ मौजूद नहीं थे।

उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ कथित साजिश में करीब 42 लोग शामिल थे और कुछ उद्योगपतियों ने इसमें धन लगाया।

पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि मीडिया में लगातार बहस कर उन्हें बलात्कार के आरोपी के रूप में पेश किया गया।

सिंह ने कहा कि उन्होंने जूनियर पहलवानों के हित में कुछ नियमों में बदलाव किये थे, जिनमें राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी, चिकित्सकीय कारणों से छूट, प्रशिक्षण शिविर में रहना और बड़े टूर्नामेंटों के दौरान ट्रायल जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।

उन्होंने कहा कि कुछ पहलवान चाहते थे कि उन्हें जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया से गुजरे बिना सीधे बड़े मुकाबलों में भेजा जाए और नियमों में बदलाव के विरोध के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।

सिंह ने आरोप लगाया कि पहलवानों का आंदोलन बाद में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य राजनीतिक दलों का ‘खिलौना’ बन गया। उन्होंने कहा कि इस विवाद से भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खेल व्यवस्था को नुकसान पहुंचा तथा महिला खिलाड़ियों और उनके परिवारों पर भी इसका असर पड़ा।

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल पर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की अपनी कोई बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं है और वह समाजवादी पार्टी के सहारे चुनाव लड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि गठबंधन होने पर कांग्रेस को कुछ सीटें मिल सकती हैं, लेकिन वह इसकी भविष्यवाणी नहीं कर रहे हैं।

भाषा सं. सलीम रंजन प्रशांत

प्रशांत