घरेलू कंपनियों ने बीते वित्त वर्ष में 360 से अधिक आईपीओ से जुटाए 1.9 लाख करोड़ रुपये: रिपोर्ट

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घरेलू कंपनियों ने बीते वित्त वर्ष में 360 से अधिक आईपीओ से जुटाए 1.9 लाख करोड़ रुपये: रिपोर्ट

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  • Publish Date - August 10, 2026 / 03:29 PM IST,
    Updated On - August 10, 2026 / 03:29 PM IST

नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) घरेलू कंपनियों ने बीते वित्त वर्ष 2025-26 में 360 से अधिक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए। इसके साथ ही भारत दुनिया के सबसे सक्रिय प्राथमिक बाजारों में शामिल रहा।

हालांकि, सूचीबद्ध होने के बाद मिलने वाले लाभ और शेयरों की संख्या के मुकाबले अधिकतम बोलियों में कमी से संकेत मिलता है कि निवेशक अब कंपनियों का चयन अधिक सावधानी से कर रहे हैं।

ग्रांट थॉर्नटन, भारत की सोमवार को जारी देश के आईपीओ बाजार पर रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और तनाव तथा बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनियों की पूंजी जुटाने की गतिविधियां मजबूत बनी रहीं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों की रुचि अब उन कंपनियों की ओर अधिक बढ़ी है जिनकी बुनियाद मजबूत हैं, कंपनी संचालन व्यवस्था बेहतर है, आय में वृद्धि की स्पष्ट संभावना है और मूल्यांकन अधिक संतुलित है।

मुख्य शेयर बाजारों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड 109 आईपीओ आए, जिनके माध्यम से करीब 1.77 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2024-25 में 80 आईपीओ के जरिये 1.63 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च, 2026 में वैश्विक स्तर पर हुए कुल आईपीओ में भारत की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत रही और इस मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहा।

इसमें कहा गया कि भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती को घरेलू निवेशकों की अच्छी भागीदारी और लगातार बढ़ते निवेशक आधार का समर्थन मिला। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रमों, जिंस कीमतों और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव निवेशकों के फैसलों पर बढ़ा है।

ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य बाजार के आईपीओ से जुटाई गई राशि में बिक्री पेशकश (ओएफएस) का दबदबा बना रहा और इसकी हिस्सेदारी 61 प्रतिशत रही। वहीं, नए शेयर जारी करने का हिस्सा बढ़कर 39 प्रतिशत हो गया, जो वृद्धि के लिए पूंजी जुटाने की गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार का संकेत है।

निवेशकों के बदले रुख का असर आईपीओ के लिए बोली और सूचीबद्ध होने के प्रदर्शन में भी दिखाई दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में आईपीओ के लिए अधिक अभिदान का औसत घटकर 39 गुना रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 71 गुना था। यह कंपनियों के मूल्यांकन, प्रबंधन गुणवत्ता और कारोबार की मजबूती को लेकर बढ़ती जांच को दर्शाता है।

इसी तरह, सूचीबद्ध होने के पहले दिन मिलने वाला औसत लाभ वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर सात प्रतिशत रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 29 प्रतिशत था। वहीं, सूचीबद्ध आईपीओ कंपनियों का औसत सालाना प्रदर्शन 17 प्रतिशत नकारात्मक रहा। इससे पता चलता है कि निवेश का माहौल अब अधिक सोच-समझकर निर्णय लेने वाला हो गया है।

ग्रांट थॉर्नटन भारत के भागीदार करण मारवाह ने कहा, ‘‘आज के आईपीओ बाजार में सफलता केवल सूचीबद्ध होने से तय नहीं होती, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि कोई कंपनी सार्वजनिक कंपनी के रूप में काम करने के लिए कितनी तैयार है और उसके पास निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहतर संचालन व्यवस्था, अनुशासन और विश्वसनीयता है या नहीं।’’

रिपोर्ट में कहा गया कि आईपीओ की तैयारी अब कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर पैदा करने वाला पहलू बन गई है। निवेशक अब केवल वित्तीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे कंपनियों के कामकाज के मानकों, जानकारी साझा करने की गुणवत्ता, पूंजी के उपयोग की योजना और सूचीबद्ध कंपनी के रूप में प्रभावी संचालन की क्षमता को भी परख रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पारदर्शिता बढ़ाने, बाजार तक पहुंच आसान बनाने और निवेशकों के हितों की सुरक्षा के उद्देश्य से हाल में किए गए नियामकीय सुधारों ने आईपीओ व्यवस्था को और मजबूत किया है।

लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) क्षेत्र में भी गतिविधियां तेज रहीं। वित्त वर्ष 2025-26 में 258 एसएमई आईपीओ के जरिये 12,030 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो पिछले तीन वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 में 242 एसएमई आईपीओ से 9,900 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में भारत का आईपीओ बाजार मजबूत बने रहने की उम्मीद है। घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक वृद्धि और विस्तृत होते निवेशक आधार से आईपीओ बाजार को समर्थन मिलेगा।

जिन कंपनियों की बुनियाद मजबूत होगी और जो आईपीओ के लिए बेहतर तैयारी के साथ आएंगी, वे सार्वजनिक बाजार से पूंजी जुटाने और सूचीबद्ध होने के बाद भी निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में अधिक सफल रहेंगी।

भाषा रमण अजय

अजय