उप्र में पंचायत चुनाव के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी
उप्र में पंचायत चुनाव के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी
लखनऊ, 18 मई (भाषा) उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग के गठन को मंत्रिमंडल ने सोमवार को मंजूरी दे दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को यहां संपन्न हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उप्र राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
पंचायती राज विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जारी प्रस्ताव के अनुसार पांच सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।
मसौदे के अनुसार आयोग में पांच सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से की जाएगी, जो पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का ज्ञान रखते हों।
प्रस्ताव में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन पांच सदस्यों में से एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग के अध्यक्ष के रूप में नामांकित किया जाएगा।
इस आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल सामान्य तौर पर नियुक्ति से छह माह तक होगा।
प्रस्ताव के अनुसार उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में सरकार ने उप्र राज्य के त्रिस्तरीय पंचायत निकायों में आरक्षण प्रदान करने के आशय से राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय लिया है।
आयोग को अन्य पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों को निकायवार आनुपातिक आरक्षण दिये जाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों (पंचायत) के पदों पर आरक्षण निर्धारण की कार्यवाही की जानी है।
प्रस्ताव के अनुसार राज्य सरकार एक आदेश द्वारा त्रिस्तरीय पंचायतों के स्थानों एवं पदों को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित करेगी।
पिछडे वर्गों के लिए आरक्षण त्रिस्तरीय पंचायतों के पदों की कुल संख्या के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा एवं यदि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध न हों तो नियत रीति से सर्वेक्षण करके उनकी जनसंख्या निर्धारित की जा सकती है।
भाषा आनन्द
मनीषा संतोष
संतोष

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