Adhik Maas 2026: आखिर क्या है ये ‘अधिक मास’ जिसका नाम सुनते ही थम जाते हैं शुभ कार्य? क्यों इस दौरान मांगलिक कार्य करना माना जाता है अशुभ?

Adhik Maas 2026: कल रविवार से अधिकमास की शुरुआत हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और खरीदारी जैसे शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। इसके पीछे धार्मिक कारण और परंपराएं जुड़ी हैं। जिन्हें पवित्र समय के रूप में देखा जाता है।

Adhik Maas 2026: आखिर क्या है ये ‘अधिक मास’ जिसका नाम सुनते ही थम जाते हैं शुभ कार्य? क्यों इस दौरान मांगलिक कार्य करना माना जाता है अशुभ?

(Adhik Maas 2026/ Image Credit: AI-generated)

Modified Date: May 18, 2026 / 01:53 pm IST
Published Date: May 18, 2026 1:40 pm IST
HIGHLIGHTS
  • 17 मई से शुरू हुआ ज्येष्ठ अधिकमास 2026
  • चंद्र और सौर कैलेंडर को संतुलित करने के लिए जोड़ा गया महीना
  • विवाह और गृह प्रवेश जैसे कार्य वर्जित

Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के मुताबिक वर्ष 2026 में अधिकमास की शुरुआत 17 मई से हो चुकी है और यह 15 जून तक चलेगा। इस बार यह अतिरिक्त महीना ज्येष्ठ मास के साथ पड़ रहा है। इसलिए इसे ‘ज्येष्ठ अधिकमास‘ कहा जा रहा है। इसे मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। इस अवधि में आमतौर पर शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक मानी जाती है। लेकिन इसे आध्यात्मिक साधना और भक्ति के लिए पवित्र समय माना जाता है।

क्या होता है अधिकमास?

अधिकमास हिंदू कैलेंडर को मौसम और खगोलीय गणना के अनुसार संतुलित करने का तरीका है। सौर वर्ष सूर्य की गति पर आधारित होता है जो लगभग 365 दिन और 6 घंटे का होता है। वहीं चंद्र वर्ष चंद्रमा की कलाओं पर आधारित होता है और लगभग 354 दिनों का होता है। दोनों में हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। इसी अंतर को ठीक करने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। जिसे अधिकमास कहा जाता है।

अधिकमास में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास को सामान्य शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। पहला कारण यह है कि इस महीने में सूर्य किसी राशि में प्रवेश नहीं करता, जिसे संक्रांति न होना कहा जाता है। दूसरा कारण यह है कि इस अतिरिक्त महीने का कोई निश्चित देवता या स्वामी नहीं माना गया। इसलिए इसे तुलनात्मक रूप से कम शुभ माना गया है। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है।

कौन-कौन से कार्य वर्जित माने जाते हैं?

अधिकमास के दौरान विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करना और नई संपत्ति या वाहन खरीदने जैसे कार्यों से परहेज किया जाता है। हालांकि यह समय आत्मचिंतन, पूजा-पाठ, जप, तप और दान-पुण्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। धार्मिक रूप से यह अवधि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर देती है।

पुरुषोत्तम मास का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब अधिकमास को मलमास कहकर उपेक्षित किया गया तो वह भगवान विष्णु की शरण में गया। भगवान विष्णु ने उसे ‘पुरुषोत्तम मास‘ का नाम दिया और उसे विशेष वरदान दिया। कहा जाता है कि इस महीने में जो भी व्यक्ति भक्ति, जप और दान करता है उसे से सामान्य समय से कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए यह समय भक्ति और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।