लखनऊ, 24 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी कम्पनियों के निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से सोमवार को ‘इन्वेस्ट यूपी’ तथा अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार 240 लोगों के प्रतिनिधिमण्डल का प्रदेश में आगमन हुआ और इस यात्रा में जापान से आए अतिथियों ने राज्य में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना की, ऐसे में जापान व उत्तर प्रदेश के बीच निरन्तर संवाद कर निवेश के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए।
राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बैठक में मुख्यमंत्री को जापान के प्रतिनिधिमण्डल की ओर से किए गए सभी समझौतों (एमओयू) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान में सितम्बर, अक्टूबर एवं दिसम्बर में होने वाले विभिन्न वैश्विक आयोजनों में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमण्डल को भी भेजा जाए, जिनमें मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, उद्योगपतियों के साथ ही सम्बन्धित क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए।
आदित्यनाथ ने कहा कि जापानी भाषा के प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और यामानाशी प्रान्त सहित जापान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार की सम्भावनाओं को सुदृढ़ किया जाए।
उन्होंने कहा कि ‘इन्वेस्ट यूपी’ में अलग से ‘यामानाशी जापान डेस्क’ बनायी जाए, ताकि इसके जरिए निरन्तर संवाद होता रहे। उन्होंने हर तीसरे महीने इसकी प्रगति की रिपोर्ट भी लेने के भी निर्देश दिये।
बयान के मुताबिक, उप्र-जापान इन्वेस्टमेंट समिट 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित बहुभाषी मंच ‘भाषिणी’ ने भाषा की रुकावटों को दूर करके और भारतीय एवं जापानी निवेशकों और हितधारकों के बीच आसानी से बातचीत मुमकिन बनाकर अहम भूमिका निभाई।
राज्य की निवेश संवर्धन एजेंसी ‘इन्वेस्ट यूपी’ और ‘भाषिणी’ के बीच एक खास सहयोग के तहत, समिट के दौरान इस तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया।
बयान में कहा गया है कि हिंदी, अंग्रेजी और जापानी भाषाओं के बीच तुरंत होने वाले अनुवाद और लिप्यांतरण से दोनों देशों के प्रतिनिधियों को अपनी पसंद की भाषाओं में बातचीत करने और चर्चाओं को समझने में मदद मिली।
भाषा सलीम आशीष सुरेश
सुरेश