तलाशी और जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य, पालन में दिक्कत क्यों : इलाहाबाद उच्च न्यायालय

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तलाशी और जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य, पालन में दिक्कत क्यों : इलाहाबाद उच्च न्यायालय

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 07:41 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 07:41 PM IST

लखनऊ, 25 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को पुलिस द्वारा तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की अनिवार्य ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग लागू करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए।

अदालत ने कहा कि जब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 105 में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान है तो पुलिस अधिकारियों को इस आवश्यकता का पालन करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति राजीव भारती ने कहा कि वर्तमान समय में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग आम बात हो गई है इसलिए बीएनएसएस की धारा 105 का पालन करना मुश्किल नहीं माना जाना चाहिए।

बीएनएसएस की धारा 105 में पुलिस द्वारा तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का प्रावधान है।

इसमें गवाहों की मौजूदगी में जब्ती पंचनामा तैयार करना और उस पर उनके हस्ताक्षर कराना भी शामिल है।

रिकॉर्डिंग को तत्काल संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजना आवश्यक है।

अदालत ने यह टिप्पणी सुलतानपुर जिले के गोसाईंगंज थाने में उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में चार आरोपियों द्वारा दाखिल अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि उनके नाम मूल प्राथमिकी में नहीं थे और बाद में एक सह-आरोपी के कथित बयान के आधार पर उनके नाम सामने आए।

याचिकाकर्ताओं ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा 21 जुलाई 2025 को जारी एक परिपत्र का भी हवाला दिया, जिसमें तलाशी और बरामदगी की कार्रवाई के दौरान ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य किया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गयी कि इस मामले में तलाशी या बरामदगी की कोई ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की गई और इसलिए अभियोजन पक्ष के पास अपने आरोपों को साबित करने के लिए ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। अदालत ने इन दलीलों पर गौर करते हुए यह भी पाया कि याचिकाकर्ताओं का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

अदालत ने कहा कि आरोपियों ने जांच में सहयोग करने का आश्वासन दिया और एक सह-आरोपी को पहले ही अंतरिम अग्रिम जमानत मिल चुकी है।

पीठ ने इसके बाद सभी चार आरोपियों को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी और यह सुरक्षा अगली सुनवाई की तारीख या आरोप पत्र दाखिल होने तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी।

भाषा सं. सलीम जितेंद्र

जितेंद्र