लखनऊ, 21 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच कराने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सीबीआई की ओर से दाखिल जवाब पर अंसतोष जताते हुए एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी को निर्देश दिया कि वह जांच में हुई प्रगति का ब्योरा सहित व्यक्तिगत रूप से नया हलफनामा दाखिल करें।
न्यायमूर्ति आर.एस. चौहान और न्यायमूर्ति बी.आर. सिंह की पीठ ने यह भी कहा कि अगर आरोपों की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कोई ऐसी सामग्री या दस्तावेज़ मिलते हैं जिनसे किसी गैर-कानूनी काम का पता चलता है, तो वह कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी से जांच कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति आर.एस. चौहान और न्यायमूर्ति बी.आर. सिंह की पीठ ने कहा कि सीबीआई की ओर से दाखिल शपथपत्र उसके पिछले आदेश के मुताबिक नहीं है और इसमें याचिकाकर्ता की ओर से गांधी के खिलाफ की गई शिकायत पर हुई प्रगति के बारे में ठीक से जानकारी नहीं दी गई है।
अदालत ने इस पर सीबीआई के नयी दिल्ली स्थित भ्रष्टाचार निरोधक मुख्यालय के संयुक्त निदेशक या संबंधित जोन के प्रमुख को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई से पहले व्यक्तिगत रूप से एक नया हलफनामा दाखिल करें जिसमें मामले में हुई प्रगति का ब्योरा दिया गया हो।
यह आदेश सोमवार को कर्नाटक के रहने वाले एस. विग्नेश शिशिर की ओर से दायर एक याचिका पर चैंबर में हुई लगभग दो घंटे चली सुनवाई के बाद दिया गया लेकिन पीठ ने मामले को आंशिक रूप से सुना गया माना और सुनवाई की अगली तारीख 20 अगस्त तय की है।
सुनवाई के दौरान सीबीआई और ईडी दोनों ने अपने जवाबी हलफनामे दाखिल किये।
पीठ ने सीबीआई के हलफनामे की जांच करने के बाद कहा, ‘‘हम सीबीआई द्वारा की गई जांच की प्रगति को समझ नहीं पा रहे हैं इसलिए अगली तारीख पर सीबीआई का जवाबी हलफनामा पिछले आदेश के अनुसार दाखिल किया जाएगा, जिसे नयी दिल्ली के भ्रष्टाचार निरोधक मुख्यालय के संयुक्त निदेशक अथवा जोन प्रमुख प्रस्तुत करेंगे।’’
पीठ ने कहा कि अगर जवाबी हलफनामे में कोई और प्रगति हुई है तो उसे स्पष्ट रूप से बताया जाए ताकि अदालत जांच की प्रगति को समझ सके।
पीठ ने ईडी के संबंध में कहा कि एजेंसी ने जरूरी शुरुआती कदम उठाए हैं और अगर जांच के दौरान निदेशालय को कोई ऐसी सामग्री या दस्तावेज मिलते हैं जिनसे किसी गैर-कानूनी काम का पता चलता है तो वह कानून के अनुसार आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र होगी।
अदालत ने केंद्र सरकार को प्रशिक्षण एवं कार्मिक विभाग, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और गम्भीर कपट जांच कार्यालय की ओर से विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय भी दिया।
पीठ ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से हाल ही में दायर दो अंतरिम याचिकाओं पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मामले का पूरा रिकॉर्ड उसके पहले के आदेशों के अनुसार वरिष्ठ रजिस्ट्रार की निगरानी में सीलबंद लिफाफे में रखा जाए।
पीठ इस मामले की खुली अदालत में सुनवाई नहीं कर रही है। सोमवार को चैंबर में सुनवाई हुई और मंगलवार को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर आदेश की प्रति अपलोड की गई।
भाषा सं. सलीम धीरज
धीरज