पहली बार अन्न ग्रहण करने वाला बच्चा भी अपना भविष्य सुरक्षित होने को लेकर आश्वस्त: योगी आदित्यनाथ
पहली बार अन्न ग्रहण करने वाला बच्चा भी अपना भविष्य सुरक्षित होने को लेकर आश्वस्त: योगी आदित्यनाथ
कुशीनगर, 11 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कुशीनगर में पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान और पिछले नौ वर्षों में हुए विकास कार्य की तुलना करते हुए दावा किया कि आज पहली बार अन्न ग्रहण करने वाला बच्चा भी आश्वस्त है कि उसका भविष्य सुरक्षित है।
योगी ने कुशीनगर में शनिवार को 525 करोड़ रुपये की लागत वाली 464 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास/लोकार्पण करने से पहले दो बच्चों का ‘अन्नप्राशन’ कराया।
अन्नप्राशन के तहत बच्चे को पहली बार ठोस अन्न खिलाया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं मंच पर आया तो दो बच्चों के ‘अन्नप्राशन’ का अवसर मिला और उस समय दोनों बच्चे रो रहे थे। मैं जैसे ही उनके पास गया, तो एक बच्चे ने रोना बंद कर दिया और एक बच्चे ने हंसना शुरू कर दिया।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अन्नप्राशन के बाद बच्चों के मन में एक नयी खुशी और एक नया उत्साह था…उन्हें हंसते देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। एक बच्चा तो मेरी गोद से अपनी मां की गोद में भी नहीं जा रहा था।’’
योगी ने कहा कि आज पहली बार अन्न ग्रहण करने वाला बच्चा भी आश्वस्त था कि उसका भविष्य सुरक्षित है।
मुख्यमंत्री ने दरअसल, पूर्वी उत्तर प्रदेश में पूर्व में इंसेफेलाइटिस से बच्चों के बीमार पड़ने और उनकी बड़ी संख्या में मौत की घटनाओं की याद दिलाई।
उन्होंने कहा, ‘‘2017 से पहले ऐसे बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी जिन सरकारों पर थी, वे वह पूरी तरह संवेदनहीन थीं, लेकिन हमारी सरकार ने इंसेफेलाइटिस की महामारी को समााप्त कर दिया।’’
योगी ने कहा, ‘‘सबसे ज्यादा इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्चे कुशीनगर से बीआरडी मेडिकल गोरखपुर कॉलेज लाए जाते थे, लेकिन अब जब बीमारी के जड़ से समाप्त होने के बाद कुशीनगर में मासूम बच्चों को देखता हूं तो मुझे लगता है कि यह एक सार्थकता है कि इन मासूम बच्चों को जीवन मिला है।’’
उन्होंने कुशीनगर की मुसहर जाति के लोगों की पीड़ा का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चार बार उसे प्रदेश में सरकार बनाने का मौका मिला लेकिन मुसहरों को मकान, जमीन का पट्टा, कोई सुविधा नहीं दे पाई।
योगी ने कहा कि कुशीनगर में संभावना पहले भी थी, लेकिन उन संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए शासन की इच्छा शक्ति कमजोर दिखती थी।
उन्होंने कहा, ‘‘आपने देखा होगा कि दुनिया में उथल-पुथल है, पहले कोरोना, फिर रूस-यूक्रेन युद्ध और फिर अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कुशीनगर हवाई अड्डे पर नए विमान नहीं आ पाए। अब हम कुशीनगर को जेवर हवाई अड्डे से जोड़ने जा रहे हैं, गया के साथ जोड़ने जा रहे हैं, और बेहतरीन सेवा कुशीनगर को देंगे।’’
भाषा आनन्द रंजन नेत्रपाल
नेत्रपाल

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