मुजफ्फरनगर में 2013 दंगों से जुड़े फ्लेक्स बोर्ड मिले, पुलिस ने हटाकर शुरू की जांच

मुजफ्फरनगर में 2013 दंगों से जुड़े फ्लेक्स बोर्ड मिले, पुलिस ने हटाकर शुरू की जांच

मुजफ्फरनगर में 2013 दंगों से जुड़े फ्लेक्स बोर्ड मिले, पुलिस ने हटाकर शुरू की जांच
Modified Date: September 7, 2026 / 09:11 pm IST
Published Date: September 7, 2026 9:11 pm IST

मुजफ्फरनगर, सात सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर शहर में सोमवार को रोडवेज बस स्टैंड के पास 2013 के दंगों से जुड़े फ्लेक्स बोर्ड लगे मिले। पुलिस ने इन्हें हटाकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सिद्धार्थ मिश्रा ने बताया कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र में कुछ आपत्तिजनक फ्लेक्स बोर्ड मिले थे, जिन्हें पुलिस ने हटवा दिया है।

मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कुछ आपत्तिजनक फ्लेक्स बोर्ड मिले थे, जिन्हें पुलिस ने हटा दिया है। इन्हें लगाने वाले लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है और मामले की जांच जारी है।’’

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन पोस्टरों पर ‘‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’’ लिखा था। इनमें 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित समाचारों की कतरनों की तस्वीरें भी लगाई गई थीं।

अधिकारियों के अनुसार, पोस्टरों पर एक कार्यक्रम में सोफे पर बैठे तत्कालीन मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर के अलावा सैफई महोत्सव जैसे कार्यक्रमों की तस्वीरें भी थीं।

इसी तरह के पोस्टर लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों, जिनमें शामली और सहारनपुर शामिल हैं, में भी लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय अधिकारियों ने बाद में इन्हें हटवा दिया।

यह मामला 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर फिर शुरू हुई राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है। ये दंगे 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले हुए थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में हुई हिंसा में 60 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 40 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।

यह मुद्दा लंबे समय से राज्य के राजनीतिक और कानूनी विमर्श का हिस्सा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर सार्वजनिक सभाओं में कहते रहे हैं कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है और अब राज्य में दंगे नहीं होते।

इससे पहले 12 अगस्त को एक विशेष सांसद-विधायक अदालत ने 2013 के दंगों से जुड़े एक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व राज्य मंत्री सुरेश राणा समेत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 25 नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की अनुमति दी थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन नेताओं पर 31 जुलाई 2013 को जिले के नगला मंडोर में आयोजित महापंचायत में निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने, लोक सेवकों के काम में बाधा डालने और भाषणों के माध्यम से सांप्रदायिक तनाव भड़काने के आरोप लगाए गए थे।

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत


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