लखनऊ, पांच जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने शुक्रवार को कहा कि बाढ़ ऐसी आपदा है, जो हर वर्ष जनजीवन को प्रभावित करती है और अनेक लोगों की जान ले लेती है।
उन्होंने कहा कि इस चुनौती का सामना किसी एक विभाग या राज्य के लिए अकेले संभव नहीं है और इसके लिए सभी हितधारकों के समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
कृष्ण ने लखनऊ छावनी स्थित सूर्य ऑडिटोरियम में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मध्य कमान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘राष्ट्रीय संगोष्ठी : बाढ़ एवं बाढ़ संबंधी आपदा प्रबंधन’ को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस का लक्ष्य जलजनित घटनाओं में होने वाली प्रत्येक संभावित जनहानि को रोकना है।
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि वर्ष 2017 में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की स्थापना के बाद प्रदेश की आपदा प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में पीएसी की 17 बाढ़ राहत कंपनियां (51 प्लाटून) और एसडीआरएफ की छह कंपनियां (18 टीमें) सक्रिय हैं तथा करीब 2,500 प्रशिक्षित जवान बाढ़ व अन्य आपदाओं से निपटने के लिए तैयार रहते हैं।
अधिकारी ने बताया कि प्रदेश के 44 जिलों को संवेदनशीलता के आधार पर चिह्नित किया गया है, जिनमें 18 अति संवेदनशील, 12 संवेदनशील और 14 सामान्य श्रेणी के जिले शामिल हैं।
कृष्णा ने बताया कि इन क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित मानवबल उपलब्ध कराया गया है।
उन्होंने बताया कि पुलिस और एसडीआरएफ के पास मोटरबोट, लाइफ जैकेट, स्कूबा डाइविंग उपकरण, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम तथा अत्याधुनिक एम्बुलेंस जैसे संसाधन उपलब्ध हैं।
शीर्ष अधिकारी ने बताया कि 16 मई से 30 जून तक विभिन्न नदी घाटों पर 45 दिवसीय विशेष अभ्यास भी चलाया जा रहा है।
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि आपदा प्रबंधन को केवल राहत एवं बचाव तक सीमित नहीं रखा जा सकता, इसके लिए नियमित अभ्यास, आधुनिक तकनीक के उपयोग, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और जन-जागरूकता पर विशेष बल देने की आवश्यकता है।
भाषा जफर जितेंद्र
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