स्मार्ट कक्षाएं मिटा रहीं गांव-शहर का अंतर, डिजिटल पुस्तकालय कम कर रहे अमीर-गरीब की दूरी: आदित्यनाथ

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स्मार्ट कक्षाएं मिटा रहीं गांव-शहर का अंतर, डिजिटल पुस्तकालय कम कर रहे अमीर-गरीब की दूरी: आदित्यनाथ

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  • Publish Date - September 5, 2026 / 04:27 PM IST,
    Updated On - September 5, 2026 / 04:27 PM IST

गोरखपुर (उप्र), पांच सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि स्मार्ट कक्षाएं शहर और गांव के बीच के अंतर को कम करने में मदद कर रही हैं, जबकि डिजिटल पुस्तकालय अमीर और गरीब के बीच की दूरी को पाट रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) बड़े बदलाव लाने वाली है और राज्य पीछे नहीं रह सकता।

मुख्यमंत्री ने यह बात गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कही, जहां उन्होंने शिक्षक दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 81 शिक्षकों को सम्मानित किया।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि जहां-जहां स्मार्ट कक्षाओं की सुविधाएं हैं, वहां शहर और गांव के बीच का अंतर खत्म हो गया है। जहां-जहां डिजिटल पुस्तकालय की सुविधा हैं, वहां अमीर और गरीब के बीच की दूरी कम हुई है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में असमानता को खत्म किया जाना चाहिए और इसके लिए प्रौद्योगिकी सबसे आसान और बेहतर माध्यम है।

आदित्यनाथ ने कहा, “आज हम तेजी से इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अक्सर यह सवाल उठता है कि इन तकनीकों के आने के बाद क्या शिक्षकों की भूमिका बनी रहेगी।

आदित्यनाथ ने कहा, “इसका जवाब आसान है। कोई भी आपकी जगह नहीं ले सकता। याद रखिए, एक मशीन जवाब दे सकती है, लेकिन वह यह नहीं सिखा सकती कि सवाल कैसे पूछे जाएं। सवाल पूछना शिक्षक ही सिखाता है।”

उन्होंने स्वीकार किया कि एआई कुछ ही सेकंड में ऐसी जानकारी दे सकता है, जिसे जुटाने में पहले घंटों लग सकते थे, लेकिन प्रौद्योगिकी मूल्य नहीं सिखा सकती।

उन्होंने कहा, “एआई मूल्य नहीं सिखा सकता, केवल शिक्षक ही मूल्यों का विकास कर सकते हैं।”

मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों को राज्य में कई बार शासन कर चुके लोग अब राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “वे उन्हीं जर्जर स्कूल भवनों को देखकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें हम पहले ही बदल चुके हैं, उनका सुधार कर चुके हैं और उन्हें ‘बाल वाटिका’ के रूप में विकसित कर चुके हैं।”

भाषा जफर

जोहेब

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