लखनऊ, छह जनवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या उसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) के तहत कार्यरत श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी के भुगतान के लिए कोई अधिसूचना जारी की है।
पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी तय की है।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्यरत कृषि श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर 2023 में दायर एक जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।
जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि प्रश्न यह है कि क्या मनरेगा के तहत कार्यरत श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत निर्धारित मजदूरी पाने का अधिकार है।
पीठ ने कहा कि मनरेगा अधिनियम, 2005 की धारा 2(एच) में ही न्यूनतम मजदूरी की परिभाषा दी गई है, जिसके अनुसार राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 की धारा तीन के तहत कृषि मजदूरों के लिए निर्धारित मजदूरी ही लागू होगी।
पीठ को यह भी अवगत कराया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में मनरेगा श्रमिकों को 230 रुपये प्रतिदिन मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से काफी कम है।
पीठ ने सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि वे कृषि मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी से संबंधित सभी अधिसूचनाएं अगली तिथि पर प्रस्तुत करें।
भाषा सं आनन्द नोमान
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