(EPFO News Update / Image Credit: Paytm)
EPFO News Update: एम्प्लॉइज प्रोविडेंड फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने छोटे इनऑपरेटिव अकाउंट्स के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इसका मकसद मेंबर्स को उनके लंबे समय से अनक्लेम्ड फंड्स तेजी से दिलाना और क्लेम प्रोसेस में होने वाली देरी को कम करना है। नई पहल के तहत 1,000 रुपये या उससे कम बैलेंस वाले अकाउंट के लिए क्लेम ऑटोमैटिकली प्रोसेस किया जाएगा। अकाउंट होल्डर को इसके लिए कोई फॉर्मल विड्रॉल रिक्वेस्ट सबमिट करने की जरूरत नहीं होगी। पहले फेज में लगभग 1.33 लाख अकाउंट जिनकी कुल रकम करीब 5.68 करोड़ रुपये है, इस प्रोजेक्ट के तहत कवर किए जाएंगे।
EPF नियमों के अनुसार, अगर किसी मेंबर के 55 साल की उम्र या रिटायरमेंट की तारीख के तीन साल बाद लगातार कोई कंट्रीब्यूशन नहीं होता है, तो अकाउंट को इनऑपरेटिव माना जाता है। बोर्ड के डेटा के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक ऐसे 31.83 लाख इनऑपरेटिव अकाउंट हैं, जिनकी कुल रकम 10,181 करोड़ रुपए है। इसमें इंटरनेशनल वर्कर अकाउंट शामिल नहीं हैं। इन अकाउंट्स को सक्रिय करने और मेंबर्स तक जल्दी फंड पहुंचाने के लिए यह नई पहल की गई है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत EPFO सीधे मेंबर के आधार लिंक्ड बैंक अकाउंट में पैसे क्रेडिट करेगा। इसके लिए किसी नए क्लेम या डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत नहीं होगी। इस कदम से पैसे निकालने का प्रोसेस आसान होगा और मेंबर अपनी बकाया रकम तेजी से पा सकेंगे। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद यह सुविधा 1,000 रुपए से अधिक बैलेंस वाले अकाउंट्स तक बढ़ाई जा सकती है। EPFO का कहना है कि इससे पेंडिंग फंड्स को तेजी से क्रेडिट करने, प्रोसेस में देरी कम करने और सर्विस डिलीवरी बेहतर बनाने में काफी मदद मिलेगी।
केंद्रीय श्रम मंत्रालय के अनुसार, EPFO एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जिससे लगभग आठ करोड़ मेंबर्स UPI के जरिए सीधे पैसे निकाल सकेंगे। इसे अप्रैल 2026 तक रोलआउट करने का लक्ष्य है। इस पहल से फंड तक तेजी से एक्सेस मिलेगा, विड्रॉल आसान होगा और सर्विस में सुधार आएगा। EPFO मौजूदा सॉफ्टवेयर की गड़बड़ियों को भी ठीक कर रहा है, जिससे अकाउंट होल्डर्स को लंबे समय से अपनाने वाले क्लेम प्रोसेस से निजात मिलेगी।