लखनऊ, 19 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के रिक्त पदों को भरने में लंबे समय से हो रही देरी पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा आवश्यक कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण यह मामला डेढ़ साल से अधिक समय से उसके समक्ष लंबित है।
हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को प्रक्रिया पूरी करने के लिए चार सप्ताह का और समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने शम्स तबरेज द्वारा दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को यह आदेश पारित किया।
अदालत ने कहा कि आयोग के पद 12 जून 2024 से रिक्त हैं।
इससे पहले 20 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के प्रमुख सचिव व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए थे। पीठ ने तब पाया था कि सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में नामांकन या नियुक्ति में देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया था।
अदालत ने 20 जुलाई को अतिरिक्त महाधिवक्ता के इस आश्वासन पर राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया था कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, मंगलवार की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह कहते हुए अतिरिक्त समय मांगा कि सक्षम प्राधिकारी सभी लंबित आवेदनों पर एक साथ विचार करना चाहते हैं।
सरकार ने अदालत को बताया कि जनवरी 2026 से अब तक 12 और आवेदन प्राप्त हुए हैं और इन पर भी विचार किया जाएगा।
पीठ ने कहा कि 20 जुलाई को अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन के बावजूद नवीनतम दलील देरी को उचित ठहराने का प्रयास प्रतीत होती है।
पीठ ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दिया गया आश्वासन पर्याप्त रूप से ठोस नहीं है।
इसके बावजूद पीठ ने सरकार को एक और अवसर देते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
भाषा सं जफर खारी
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