उच्च न्यायालय ने एसबीआई को गलत तरीके से वसूली गयी रकम वापस करने के आदेश दिए
उच्च न्यायालय ने एसबीआई को गलत तरीके से वसूली गयी रकम वापस करने के आदेश दिए
लखनऊ, 17 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को एक कर्जदार व्यक्ति की मृत्यु के बाद ऋण वसूली के लिये उसकी विधवा के सावधि जमा कोष से निकाले गये 19 लाख 90 हजार रुपये फौरन वापस करने के आदेश दिये और बैंक के इस कदम को बैंकिंग नियमों का ‘घोर उल्लंघन’ बताया।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने एसबीआई को निर्देश दिया कि वह महिला को एक लाख रुपये बतौर हर्जाना अदा करे, क्योंकि बैंक ने जिस तरह से बकाया रकम को वसूला, वह गलत था।
अदालत ने यह आदेश नेहा मिश्रा नाम की महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
नेहा के पति लखनऊ के रिंग रोड स्थित मेडिसिन हॉस्पिटल में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। उन्होंने नवंबर 2020 में एसबीआई से 15 लाख रुपये का ऋण लिया था।
अदालत ने पाया कि महिला कर्ज लेने की प्रक्रिया में न तो सह-आवेदनकर्ता थी और न ही जमानतदार, क्षतिपूर्ति करने वाली या नॉमिनी थी और न ही उसका बैंक के साथ कोई सीधा अनुबंध था।
दावा है कि कर्ज पर एक बीमा कवर लिया गया था जिसके लिए नेहा के पति ने 8,803 रुपये बतौर प्रीमियम राशि चुकाये थे।
मई 2021 में कोविड-19 के दौरान नेहा के पति की मौत के बाद एसबीआई ने सितंबर 2025 में नेहा को कानूनी नोटिस भेजकर 13.87 लाख रुपये के बकाया कर्ज का भुगतान करने को कहा था। बाद में बैंक ने नेहा के वेतन खाते को रोक दिया था, जिसे आरबीआई के लोकपाल की दखल के बाद ही हटाया गया।
यह मामला चल ही रहा था तभी एसबीआई ने उसकी सावधि जमा (एफडी) कोष से 19 लाख 90 हजार रुपये निकाल लिये।
अदालत ने पाया कि महिला ने 2025 में एसबीआई की आशियाना शाखा में जो एफडी करवाई थी उसे जानकीपुरम शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां से नेहा के पति ने कर्ज लिया था और रकम निकालने के बाद खाते को वापस आशियाना शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया।
पीठ ने इस प्रक्रिया को ‘चोरी-छिपे’ किया गया काम बताते हुए कहा कि एसबीआई ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं दिखा पाया जो उसे पति के बकाया कर्ज की वसूली के लिए पत्नी के खाते से सीधे तौर पर धनराशि निकालने की इजाजत देता हो।
अदालत ने एसबीआई को निर्देश दिया कि वह पूरी रकम चार सप्ताह के भीतर एफडी की दर से ब्याज सहित वापस करे और इसी अवधि में एक लाख रुपये का हर्जाना भी दे।
भाषा सं. सलीम गोला
गोला

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