सहारनपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित अवैध मस्जिद ढहाई गई, सपा, बसपा, कांग्रेस ने किया विरोध

सहारनपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित अवैध मस्जिद ढहाई गई, सपा, बसपा, कांग्रेस ने किया विरोध

सहारनपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित अवैध मस्जिद ढहाई गई, सपा, बसपा, कांग्रेस ने किया विरोध
Modified Date: September 5, 2026 / 04:09 pm IST
Published Date: September 5, 2026 4:09 pm IST

सहारनपुर, पांच सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित कथित तौर पर अवैध मस्जिद को शनिवार तड़के गिरा दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

पुलिस उपमहानिरीक्षक अभिषेक सिंह ने पत्रकारों को बताया कि कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा अवैध घोषित किए जाने के बाद आज प्रशासन ने इसे हटाने की कार्रवाई शुरू की।

सिंह ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद जिला अदालत में अपील की गई थी लेकिन अपील खारिज होने के बाद सरकारी भूमि को खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है।

मामले के अनुसार, वर्ष 2025 में इस मस्जिद को अवैध बताते हुए बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी ने नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को नगर मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध माना और अपने फैसले में इसे हटाने का आदेश दिया।

मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला अदालत में अपील की और करीब डेढ़ माह की सुनवाई के बाद जिला न्यायाधीश ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को बहाल रखते हुए मामले में दखल देने से इनकार कर दिया।

सिंह ने कहा कि पूरी कार्यवाही निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है, और साथ ही प्रशासन की ओर से किसी भी स्थिति से निपटने एवं शहर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि मौके पर पांच बटालियन पीएसी के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, साथ ही संवेदनशील स्थानों पर पुलिस अधिकारियों की निगरानी बराबर बनी हुई है।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना सहारनपुर का नाम लिये इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पर कहा, ”भाजपा चाहे जितनी नाइंसाफ़ी करना कर ले लेकिन अब वो ख़ुद ख़ौफ़ में है और वो भी लोगों की आवाज़ से नहीं बल्कि उनकी ख़ामोशियों से डरकर। क़ानून का सहारा लेकर ग़ैर क़ानूनी काम करने का दौर कुछ समय के लिए हावी हो सकता है पर हमेशा नहीं चलता।”

उन्होंने कहा, ”जिस भाजपा ने मंदिर के दान-मान को लूट लिया वो किसी की आस्था के प्रतीकों का मोल क्या जाने। सारा मुस्लिम, बौद्ध, सिख, जैन अल्पसंख्यक, पिछड़ा, दलित समाज देख रहा है कि किस तरह उनपर अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है।”

यादव ने कहा, ”पीड़ित जब चुप हो जाता है तो उसका विरोध मौन होकर भी मुखर होने लगता है। अब ‘पीडीए’ अपनी एकजुटता दिखाएगा, ‘सामाजिक न्याय का राज’ लाकर एक सौहार्दपूर्ण ‘बंधुराष्ट्र’ बनाएगा!”

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आए दिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है, वह ठीक नहीं है। सरकार को ऐसे नकारात्मक हालात से बचने के लिए इस पर तत्काल रोक लगाकर समाधान के अन्य उपाय करने चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक संवैधानिक धर्मनिरपेक्ष सरकार का दायित्व है कि वह सभी धर्मों के मानने वालों और उनके धार्मिक स्थलों का समान रूप से सम्मान एवं सुरक्षा सुनिश्चित करे।’’

मायावती ने कहा कि बसपा सरकार की तरह ‘कानून द्वारा कानून का राज’ कायम रखना जरूरी है।

उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा, ”सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में 1911 में बनी मस्जिद को तोड़े जाने की खबर बेहद दुखद और शर्मनाक है। नफरत और विभाजन की राजनीति से समाज मजबूत नहीं होता, बल्कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारा कमजोर होता है।”

उन्होंने कहा,”कांग्रेस पार्टी स्पष्ट रूप से मानती है कि उत्तर प्रदेश में हर धर्म, हर समुदाय और हर नागरिक के साथ न्याय होना चाहिए। भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि बुलडोज़र से धार्मिक इमारतें तोड़ी जा सकती हैं, लेकिन लोकतंत्र की आवाज़ और जनता के अधिकारों को नहीं दबाया जा सकता।”

राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश भाईचारे, न्याय और सामाजिक सौहार्द की धरती है, इसे नफरत और विभाजन की राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जा सकता।

प्रदेश के पंचायत राज मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने शनिवार को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद पर हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर कहा है कि न्यायालय के आदेश पर मस्जिद तोड़ी गयी है।

उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश सर्वोपरि होता है।

सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद, पूर्व सांसद फजलुरहमान और कैराना की सांसद इकरा हसन ने इस मस्जिद को हटाए जाने की आलोचना की। सांसद हाजी फजलुरहमान ने कहा कि प्रशासन का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है और यह बेहद पीड़ादायक है।

भाषा सं जफर मनीष जोहेब

जोहेब


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