लखनऊ, 19 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज सहित राज्य भर के प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या बेहतर व्यवस्थाओं को दर्शाती है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में ‘सुगम दर्शन’ के लिए कोई शुल्क तय नहीं किया गया है।
विधान परिषद में सवालों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री और सदन के नेता केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रबंधन उसके मंदिर न्यास परिषद द्वारा किया जाता है, जो किसी भी ‘सुगम दर्शन’ शुल्क पर भी निर्णय लेता है, जबकि अयोध्या स्थित राम मंदिर में ‘सुगम दर्शन’ के लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं है।
मौर्य ने बताया कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच काशी में सुगम दर्शन के लिए लगभग 10.7 लाख श्रद्धालुओं को दर्शन पर्ची जारी की गई।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मंदिरों में सामान्यत: सुगम दर्शन शुल्क लागू करने का निर्णय संबंधित मंदिर प्रबंधन या ट्रस्ट द्वारा लिया जाता है, सरकार केवल सुरक्षा और व्यवस्थाओं की निगरानी करती है।
उन्होंने बताया कि काशी विश्वनाथ धाम गलियारा बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में जहां लगभग 77 लाख श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 17 करोड़ से अधिक हो गई।
मौर्य ने यह भी बताया कि विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जहां लगभग 28 हजार विदेशी श्रद्धालु आए थे, वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या करीब 3.99 लाख और वर्ष 2025 में 3.21 लाख रही।
उन्होंने कहा कि बेहतर व्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं के कारण देश-विदेश से श्रद्धालुओं का विश्वास बढ़ा है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार तीर्थस्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भाषा जफर शफीक
शफीक