जाति-धर्म के आधार पर मतदाताओं को प्रभावित करने से पूरी तरह नहीं रोका नहीं जा सकता: उच्च न्यायालय

Ads

जाति-धर्म के आधार पर मतदाताओं को प्रभावित करने से पूरी तरह नहीं रोका नहीं जा सकता: उच्च न्यायालय

  •  
  • Publish Date - February 4, 2026 / 12:09 AM IST,
    Updated On - February 4, 2026 / 12:09 AM IST

लखनऊ, तीन फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक पार्टी को जाति या धर्म के आधार पर मतदाताओं को प्रभावित करने की बुनियाद पर चुनाव लड़ने से पूरी तरह से नहीं रोका जा सकता।

अदालत ने कहा कि ऐसे प्रावधान बनाना विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने साफ किया कि निर्वाचन आयोग के पास इस आधार पर किसी राजनीतिक पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की शक्ति नहीं है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए. के. चौधरी की खंडपीठ ने यह फैसला 2013 में मोतीलाल यादव द्वारा दायर की गयी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में राजनीतिक पार्टियों द्वारा जाति-आधारित रैलियां आयोजित किये जाने पर रोक लगाने का आदेश देने का आग्रह किया गया था।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 8—ए ही एकमात्र प्रावधान है जो चुनावी गड़बड़ी के मामलों में अयोग्यता की अनुमति देता है।

पीठ ने साफ किया कि मौजूदा कानून में किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति पर पहले से प्रतिबंध लगाने का कोई प्रावधान नहीं है और ऐसी कोई भी शक्ति केवल संसद ही दे सकती है।

भाषा सं. सलीम राजकुमार

राजकुमार