लखनऊ, 24 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कहा है कि फ्लैट का देरी से कब्जा लेने से कोई मकान खरीदार कब्जे में विलंब के लिए ब्याज पर दावा करने के कानूनी अधिकार से वंचित नहीं हो जाता।
अदालत ने बुधवार को कहा कि रीयल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) कानून (रेरा) कब्जे में देरी के चलते ब्याज के दावे के लिए कोई विशेष सीमित अवधि निर्धारित नहीं करता।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने नोएडा के सेक्टर 78 में अंतरिक्ष गोल्फ व्यू परियोजना से जुड़े एक विवाद में अंतरिक्ष डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
क्रेता श्याम सुंदर अग्रवाल ने 2010 में इस परियोजना में एक फ्लैट बुक किया था और नवंबर, 2012 तक उसे कब्जा मिलना था। हालांकि, डेवलपर ने मई, 2017 में कब्जा देने की पेशकश की और अदालत के मुताबिक, कब्जा प्रमाणपत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज के बगैर ऐसा किया गया।
रेरा अपीलीय अधिकरण ने डेवलपर को दिसंबर, 2012 से मई, 2017 की अवधि के लिए अग्रवाल को जमा राशि पर एमसीएलआर से ऊपर एक प्रतिशत ब्याज दर पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया था।
डेवलपर ने इस आदेश को यह कहते हुए चुनौती दी कि यह विलंब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के कारण हुआ जिसमें ओखला पक्षी अभयारण्य की परिधि से 10 किलोमीटर के भीतर निर्माण एवं कब्जा प्रमाणपत्र देने पर रोक लगाई गई थी।
अदालत ने यह कहते हुए इस दलील को खारिज कर दिया कि डेवलपर का यह अपना मामला था कि परियोजना 2014 में पूरी कर ली गई थी और उसी वर्ष कब्जा प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया था।
भाषा सं राजेंद्र संतोष नेत्रपाल मनीषा
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