लखनऊ केजीएमयू में मांसाहार पर रोक के बाद अब परोसा जाएगा प्रोटीन से भरपूर शाकाहारी भोजन

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लखनऊ केजीएमयू में मांसाहार पर रोक के बाद अब परोसा जाएगा प्रोटीन से भरपूर शाकाहारी भोजन

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 07:43 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 07:43 PM IST

लखनऊ, 17 जुलाई (भाषा) लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में हाल में मांसाहार बनाने पर रोक के बाद मांसाहारियों को पोषण की कमी से बचाने के लिए छात्रावास के मेस में अब प्रोटीन से भरपूर शाकाहारी खाना परोसा जाएगा।

मांसाहार बनाने पर लगी रोक की बढ़ती आलोचना के बीच अधिकारियों ने बताया कि विश्‍वविद्यालय के छात्रावास मेस की व्यंजन सूची (मेन्यू) में अब सोया चंक्स, पनीर, टोफू और प्रोटीन से भरपूर दूसरी चीज़ें शामिल की जाएंगी।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 13 जुलाई को केजीएमयू में दीक्षांत समारोह के दौरान यह मुद्दा उठाया, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने मांसाहार बनाने पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया।

कुलाधिपति पटेल ने कहा था कि केजीएमयू के कुछ छात्रावास में मांसाहारी खाना परोसा जा रहा है, जिसके बाद अधिकारियों ने ऐसे आहार पर पूरी तरह रोक लगा दी।

केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने स्वीकार किया कि परिसर के सभी 18 मेस को प्रोटीन से भरपूर भोजन उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘एक औसत शाकाहारी वयस्क के लिए रोजाना प्रोटीन की ज़रूरत 100 ग्राम होती है। मुद्दा मांसाहारियों के लिए प्रोटीन की मात्रा सुनिश्चित करने का था।’

उन्होंने कहा कि मेस अब यह सुनिश्चित करेंगे कि रोजाना थाली में सोया चंक्स, पनीर, टोफू जैसी चीज़ों के ज़रिए 100 ग्राम प्रोटीन शामिल हो।

अधिकारियों ने बताया कि केजीएमयू प्रशासन ने हॉस्टल मेस को पके हुए छोले, राजमा, दही, कई तरह की दालें, दूध, मूंगफली, कद्दू के बीज और प्रोटीन के दूसरे शाकाहारी स्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया है।

विश्वविद्यालय परिसर में मांसाहार परोसने पर लगी रोक को सही ठहराते हुए केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि ‘हमारे देश में बहुत गर्मी और उमस होती है, इसलिए, मांसाहार खाने में साफ-सफाई बनाए रखना मुश्किल होता है, खासकर तब जब इसे बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा हो।’

उन्होंने कहा कि शाकाहार दुनिया भर में पसंद किया जाने वाला विकल्प बनता जा रहा है।

नित्यानंद ने कहा, ‘हम अब दुनिया भर में ज़्यादा लोगों को शाकाहारी बनते देख रहे हैं क्योंकि यह एक ज़्यादा सेहतमंद विकल्प है, जिसमें पेट और आंतों के कैंसर का खतरा बहुत कम होता है।’

प्रोफेसर नित्‍यानंद ने कैंपस में मांसाहार बनाने पर रोक को सही ठहराते हुए राज्यपाल के ‘सुझाव’ को ‘बहुत सकारात्मक’ बताया।

केजीएमयू के एक अधिकारी ने पहले ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि अंडे से बनी चीज़ें भी आधिकारिक हॉस्टल मेस मेन्यू का हिस्सा नहीं हैं, और कैंपस में सभी लोग इस बात से सहमत नहीं हैं।

एक वरिष्ठ संकाय सदस्य ने सवाल किया, ‘क्या केजीएमयू एक चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय नहीं हैं? क्या चिकित्सकों को उन मरीज़ों को भी अंडा खाने की सलाह देना बंद कर देना चाहिए जिन्हें इसे खाने में कोई दिक्कत नहीं है? क्या हम पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले छात्रों की पसंद को नजरअंदाज करते हुए खान-पान की पाबंदियां और आदतें थोप नहीं रहे हैं?’

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. कुमार शांतनु ने पहले ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने राज्‍यपाल द्वारा उठाए गए मुद्दों पर काम करने के लिए उप कुलपति की अध्यक्षता में एक कार्यबल बनाया है।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मांसाहार पर रोक को गलत बताया है और इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।

भाषा अरुणव मनीष आनन्‍द जोहेब

जोहेब