Chabahar Port Attack: अमेरिकी हमलों से गिरा चाबहार का आइकॉनिक टावर, भारत के अरबों रुपए आए खतरे में, जानें युद्ध से देश को होंगे कौन से नुकसान

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Chabahar Port Attack News:अमेरिका द्वारा चाबहार पोर्ट पर किए गए हमले में इस पोर्ट का आइकॉनिक मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर ध्वस्त हो गया।

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 06:35 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 06:41 PM IST

Chabahar Port Attack News/Image Credit: X Handle

HIGHLIGHTS
  • अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमला किया है।
  • चाबहार पोर्ट पर किए गए भीषण हमले में मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर ध्वस्त हो गया।
  • टावर को गिराने के लिए अमेरिकी ने एक नहीं तीन तीन बार हमले किए।

Chabahar Port Attack News: नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर से हमलों का दौर शुरू हो चुका है। दोनों ही देश एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमला किया है। चाबहार पोर्ट पर किए गए भीषण हमले में इस पोर्ट का आइकॉनिक मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर ध्वस्त हो गया। बताया जा रहा है कि, इस टावर को गिराने के लिए अमेरिकी ने एक नहीं तीन तीन बार हमले किए। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, पहला हमला 8 जुलाई को हुआ, 15 जुलाई को अमेरिका ने इस पर फिर मिसाइल दागे, लेकिन 16 जुलाई का रात को भीषण हमले के बाद आखिरकार ये टावर ध्वस्त हो गया।चाबहार तेहरान का मुख्य समुद्री गेटवे है जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरता है। चाबहार का ट्रैफिक कंट्रोल तबाह होने से शिपिंग में रुकावट आ सकती है, लागत बढ़ सकती है और खाड़ी के बाहर ईरान की बची हुई कुछ आर्थिक जीवनरेखाओं में से एक पर और दबाव पड़ सकता है।

ईरान की एक न्यूज़ एजेंसी के अनुसार चाबहार फ्री जोन ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख मोहम्मद सईद अरबाबी ने पुष्टि की कि जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाला टावर नष्ट हो गया है। (Chabahar Port Attack News) ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि हमलों में बंदरगाह पर दो समुद्री पियर्स (घाट) को भी नुकसान पहुंचा है। जिनमें शहीद बेहेश्ती डॉक भी शामिल है। यह समुद्र के किनारे विकसित एक समुद्री परिवहन सुविधा है। इसे भारत की भागीदारी से विकसित किया गया था।

चाबहार इलाके भारत ने किया है निवेश

Chabahar Port Attack News:  ईरान के चाबहार इलाके में भारत ने बहुत ज्यादा निवेश किया हुआ है। यहां भारत 120 मिलियन डॉलर यानी कि लगभग साढ़े 11 अरब रुपये निवेश कर चुका है। अमेरिका के इस हमले में भारत का निवेश भी प्रभावित हुआ है। अमेरिकी हमले में जो मैरीटाइम ट्रैफिक टावर गिरा है, वो शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल पर ही बना हुआ है। शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को भारत ने ही बनाया है।

भारत ने चाबहार परियोजना में पिछले कई वर्षों से बड़ा निवेश किया है। 2024 में इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड ने ईरान के साथ 10 वर्ष का संचालन समझौता किया था, जिसके तहत लगभग 37 करोड़ डॉलर (370 मिलियन डॉलर) तक के निवेश और विकास की योजना बनाई गई थी। (Chabahar Port Attack News) यह बंदरगाह भारत के लिए इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पाकिस्तान को दरकिनार कर व्यापारिक पहुंच मिलती है। चाबहार ईरान का एक मात्र पोर्ट है जो हिंद महासागर से जुड़ा है।

चाबहार पोर्ट में दो टर्मिनल हैं। शाहिद बेहेश्ती और शाहिद कलंतरी. इन टर्मिनल में कई बर्थ और कार्गो संभालने की आधुनिक सुविधाएं हैं। भारत सरकार की कंपनी ‘इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड’ (IPGL) 2018 से शहीद बेहेश्ती टर्मिनल का कामकाज संभाल रही है। मई 2024 में ईरान के साथ हुए 10 वर्षीय समझौते के तहत IPGL को इस टर्मिनल के जनरल कार्गो और कंटेनर टर्मिनल का संचालन सौंपा गया था।

IPGL चाबहार में कर रही थी क्या-क्या काम?

IPGL चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल का संचालन और जहाजों की आवाजाही का प्रबंधन कर रही थी। इसके अलावा कंटेनर और बल्क कार्गो की लोडिंग-अनलोडिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने का जिम्मा भी IPGL के पास था। बंदरगाह के लिए मोबाइल हार्बर क्रेन, रीच स्टैकर, फोर्कलिफ्ट और अन्य कार्गो हैंडलिंग उपकरण उपलब्ध कराने का जिम्मा भी भारत की कंपनी IPGL के पास है। अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार अमेरिकी हमलों में सबसे अधिक नुकसान Maritime Traffic Control प्रणाली को हुआ है। अमेरिकी हमले में मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर तबाह हो गया है और बंदरगाह की नेविगेशन और जहाजों की आवाजाही की निगरानी प्रभावित हुई।

भारत ने किया है कितना निवेश?

Chabahar Port Attack News:  2024 में ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन के साथ 10 साल का ऑपरेशनल एग्रीमेंट साइन करने के बाद से भारत ने चाबहार में लगभग 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर (साढ़े 11 अरब रुपए) का निवेश किया है। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से यहां भारत का निवेश और काम की गति प्रभावित हो रही है।

हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों से भारत के इस रणनीतिक निवेश पर अनिश्चितता बढ़ गई है। यदि बंदरगाह लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो भारत की इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जुड़ी योजनाओं, अफगानिस्तान को मानवीय सहायता और मध्य एशिया के साथ व्यापारिक संपर्क पर असर पड़ सकता है। बीमा लागत, समुद्री मालभाड़ा और जहाजों की आवाजाही भी महंगी होने की आशंका है। (Chabahar Port Attack News) बता दें कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां ईरान से जुड़े जोखिम के कारण दूरी बनाती रहीं हैं।

इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) भारत, ईरान, रूस और मध्य एशियाई देशों को जोड़ने वाला लगभग 7,200 किलोमीटर लंबा समुद्री, रेल और सड़क व्यापार मार्ग है। इसका उद्देश्य भारत से रूस और यूरोप तक माल पहुंचाने का समय और लागत कम करना है, जिसमें ईरान का चाबहार पोर्ट और बंदर अब्बास अहम कड़ियां हैं।

क्या डूब गया भारत का निवेश ?

Chabahar Port Attack News:  भारत का निवेश डूब गया, ऐसा कहना ठीक नहीं होगा. अमेरिकी प्रतिबंध के बीच भारत चाबहार में अपने निवेश पर धीरे धीरे काम कर रहा है, लेकिन अमेरिकी हमले निश्चित रूप से भारत के लिए झटका हैं। भारत अपने स्तर पर लगातार अमेरिकी प्रशासन से संपर्क में है। गौरतलब है कि चाबहार से न सिर्फ ईरान का फायदा है बल्कि अफगानिस्तान के लिए भी व्यापारिक गतिविधियों में उतरने का मौका है।

भारत के लिए असली चिंता प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान से ज्यादा रणनीतिक नुकसान है। चाबहार भारत की उस योजना का केंद्र है, (Chabahar Port Attack News) जिसके जरिए वह पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक पहुंच बनाना चाहता है। यदि हमलों के कारण बंदरगाह का संचालन लंबे समय तक बाधित रहता है, तो व्यापार, शिपिंग, बीमा लागत और INSTC कॉरिडोर की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस निवेश से अपेक्षित आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिलने की गति काफी धीमी हो गई है, और हर नए प्रतिबंध या सैन्य तनाव के साथ परियोजना पर अनिश्चितता बढ़ जाती है।

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