बेरोजगारी की समस्या दूर करें केंद्र और राज्य सरकारें : मायावती

बेरोजगारी की समस्या दूर करें केंद्र और राज्य सरकारें : मायावती

बेरोजगारी की समस्या दूर करें केंद्र और राज्य सरकारें : मायावती
Modified Date: August 10, 2026 / 04:04 pm IST
Published Date: August 10, 2026 4:04 pm IST

लखनऊ, 10 अगस्त (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकारों से खाली सरकारी पदों पर भर्ती शुरू करने तथा बेरोजगारी, महंगाई एवं गरीबों और कामकाजी लोगों को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों से निपटने के लिए असरदार कदम उठाने की अपील की।

मायावती ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की पिछली सरकार ने पुलिस और पंचायती राज विभागों में लगभग दो लाख 25 हजार नये सरकारी पद सृजित किये थे और भर्ती पर लगी रोक हटा दी थी, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के कई लाख लोगों को नौकरी मिली थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाद की सरकारें महंगाई, अत्यधिक गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, खराब स्वास्थ्य सेवा, पिछड़ेपन, पलायन, महिलाओं की सुरक्षा, पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के प्रति काफी हद तक उदासीन एवं लापरवाह रही हैं।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के 36 दिनों तक चले आंदोलन का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि बेरोजगारी और अनिश्चित भविष्य इस वक्त राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे बन गए हैं। उन्होंने मांग की कि सरकारें तुरंत गरीबों, श्रमिकों, युवाओं और महिलाओं की चिंताओं का समाधान करें।

सरकारी नौकरियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताते हुए उन्होंने राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचे जाने को रोकने और सभी सरकारी विभागों में खाली पदों पर भ्रष्टाचार और पेपर-लीक मुक्त भर्ती तुरंत शुरू करने की मांग की।

मायावती ने कहा कि एक परिवार में कम से कम एक सरकारी नौकरी देने से लाखों परिवारों को इसका सीधा फायदा हो सकता है और आरक्षण के लाभों से काफी हद तक वंचित रखे गये अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों को अधिक सुरक्षा मिल सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘सभी सरकारों को हर हाल में मुनाफाखोरी/लाभ कमाने वाली व्यापारिक सोच/प्रवृति को त्याग कर संविधान की सही मानवतावादी एवं कल्याणकारी नीति एवं सिद्धान्त को पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ अमल करके आगे बढ़ाना होगा।”

बसपा प्रमुख ने कहा कि जंतर मंतर पर आन्दोलित छात्र-छात्राओं एवं बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर संसद के वर्तमान सत्र में अब तक लगातार जारी गतिरोध को भी समाप्त किया जाना ज़रूरी है, ताकि बिना समुचित बहस और चर्चा के सरकारी विधेयकों को पारित होकर कानून बनने की प्रक्रिया पर विराम लग सके।

भाषा सलीम

राजकुमार

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