गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग कर रहे मुस्लिम संगठनों की सोच ‘पशुवत’ : योगी

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गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग कर रहे मुस्लिम संगठनों की सोच ‘पशुवत’ : योगी

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 06:01 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 06:01 PM IST

बिजनौर, एक जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग कर रहे मुस्लिम संगठनों की कड़ी आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि ‘पशुवत’ सोच के ‘आक्रांता’ लोग सनातन परंपरा में ‘माता’ का दर्जा रखने वाली गाय को पशु बता रहे हैं।

मुख्यमंत्री बिजनौर में पाकिस्तान से विस्थापित 1,645 परिवारों और पूर्व सैनिकों तथा पट्टाधारकों को भूमि अधिकार पत्र के वितरण के लिए आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु्’ घोषित करने की मांग किए जाने को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद (एएम गुट) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और अन्य मुस्लिम संगठनों पर जमकर निशाना साधा।

योगी ने कहा, “आजकल तमाम मौलवी और मौलाना गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं। हमने कहा कि गाय हमारी माता है और हमारा जन्म-जन्मांतर का नाता है।”

उन्होंने कहा, “गाय हमारे लिए पशु नहीं है। पशुवत आपकी (गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करने वाले मुस्लिम संगठनों की) सोच है, जो आप गौ माता को पशु बोल रहे हैं।”

योगी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करने वाले मुस्लिम संगठनों पर दोहरा रवैया रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आप एक तरफ गोकशी में शामिल लोगों को प्रश्रय देते हैं और दूसरी तरफ गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करते हैं।”

योगी ने ऐसे मुस्लिम संगठनों को ‘आक्रांता’ करार देते हुए कहा, “किसी आक्रांता को यह बताने की आवश्यकता नहीं है। गाय तो स्व घोषित राष्ट्र माता है और किसी को उसे राष्ट्र माता घोषित करने की जरूरत नहीं है।”

मदनी ने पिछले महीने बकरीद से पहले एक बयान में सरकार से गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग की थी। कई प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने भी मदनी की इस मांग का समर्थन किया था।

योगी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता के कारण विस्थापित लोगों के लिए किसी मौलाना या मौलवी ने न तो आवाज उठाई और न ही यह कहा कि उन्होंने वक्फ के नाम पर यहां के हिंदुओं की जो जमीन कब्जा की है, उसे वे उन विस्थापितों को मुफ्त में दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर वे ऐसी घोषणा करते, तो माना जाता कि उनके अंदर कुछ संवेदना है।

उन्होंने दावा किया कि किसी भी मौलाना ने बांग्लादेश में हिंदुओं के कत्लेआम के खिलाफ आवाज नहीं उठाई और न ही पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदुओं की आबादी में गिरावट पर आपत्ति जताई।

योगी ने आरोप लगाया कि पिछले दिनों बकरीद के अवसर पर इन मौलवियों और मौलानाओं के ‘चेले—चपाटों’ ने सोशल मीडिया पर गाय की तस्वीरें लगाकर बधाई दी। उन्होंने कहा, “गनीमत है कि सरकार पहले से ही कदम उठाती है, तभी पर्व और त्यौहार शांतिपूर्ण तरीके से हो पा रहे हैं।”

योगी ने पिछले दिनों गाजियाबाद में एक युवक की उसके मुस्लिम दोस्त द्वारा कथित तौर पर चाकू मारकर हत्या किए जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा, “कैसी दोस्ती? आपने अभी गाजियाबाद में देखा होगा, दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी? यह स्वीकार नहीं है और कतई स्वीकार नहीं होगा।”

उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, “मैं यही कहने आया हूं कि हम सबको इस बात को ध्यान में रखना होगा कि अहिंसा और करुणा मानवता के भूषण हैं, लेकिन शस्त्र उठाना होगा, अगर सामने खर-दूषण हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “भगवान कृष्ण ने भी कहा था परित्राणाय साधुनाम। यानी सज्जनों के लिए ही हम सज्जन बनें, दुर्जनों के लिए नहीं। भगवान राम ने भी वही किया था। एक ही लक्ष्य था कि धरती को राक्षसों से विहीन कर देंगे, क्योंकि वे ऋषि-मुनियों, सामान्य नागरिकों और गरीबों की बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उनसे लड़ना होगा। उनसे निपटना होगा। देश के खिलाफ विद्रोह करने वालों के प्रति उतनी ही कठोरता के साथ, उतनी ही निर्ममता के साथ लड़ने के लिए तैयार होना होगा।”

हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से काम करते हुए सभी विकास योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी को उपलब्ध करा रही है।

योगी ने विस्थापित 1,645 परिवारों को भूमि प्रमाणपत्र दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक संदेश देने का कार्यक्रम है कि 1,645 परिवारों की आठ से 10 हजार की आबादी लाभान्वित होने जा रही है।

उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर इन परिवारों का तीन-तीन पीढ़ियों तक कोई पुरसाहाल नहीं लेने का आरोप लगाया और कहा कि इतने वक्त तक सत्ता में रही ये दोनों पार्टियां इन परिवारों की दुर्दशा पर खामोश रहीं।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और सपा पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण विस्थापित हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैन समाज के लोगों को भारत की नागरिकता देने के लिए केंद्र की भाजपा नीत सरकार द्वारा पारित संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का विरोध करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने इन विस्थापितों को भारत की नागरिकता दिए जाने का विरोध किया। वे बांग्लादेशी घुसपैठियों को नागरिकता देने वाले पापी हैं। वे भारत के खिलाफ द्रोह करने वाले अपराधियों को सम्मानित करते हैं, भारत का विभाजन करने वाली मुस्लिम लीग के साथ मिलकर केरल में सरकार बनाते हैं, लेकिन हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैन समाज के लोगों को मिलने वाले अधिकार पर उन्हें एतराज है।”

योगी ने कहा, “संशोधित नागरिकता कानून में कहीं नहीं लिखा था कि किसी मुसलमान की संपत्ति पर कब्जा किया जाएगा, लेकिन मुसलमान भी उसका विरोध कर रहे थे। और अब ये लोग गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं।”

भाषा सलीम पारुल माधव

माधव