लखनऊ/बदायूं (उप्र), 14 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार ने बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बृजेश कुमार सिंह का तबादला लखनऊ कर दिया। सिंह को पुलिस अधीक्षक लॉजिस्टिक्स’ के पद पर तैनात किया गया है। एक बयान में यह जानकारी दी गयी है।
पुलिस ने शुक्रवार देर रात एक बयान में कहा कि उनकी जगह कासगंज की पुलिस अधीक्षक (एसपी) अंकिता शर्मा को बदायूं का एसएसपी तैनात किया गया है।
राज्य में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सात अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया गया ।
बदायूं के एसएसपी का लखनऊ तबादला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह एक घटना के ठीक एक दिन बाद किया गया।
इस बीच भाजपा के एक पूर्व सांसद ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
बदायूं में बृहस्पतिवार को एक इथेनॉल संयंत्र के दो वरिष्ठ अधिकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और पुलिस ने इस हत्या के मामले में एक ‘ब्लैक लिस्टेड वेंडर’ को गिरफ्तार किया है।
अधिकारियों ने बताया कि यह घटना मूसाझाग थानाक्षेत्र के सजनी गांव में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के संयंत्र में हुई। मृतकों की पहचान संयंत्र के महाप्रबंधक सुधीर कुमार गुप्ता (58) और सहायक महाप्रबंधक हर्षित मिश्रा (34) के रूप में हुई।
तत्कालीन एसएसपी बृजेश कुमार सिंह ने बताया था कि कथित शूटर अजय प्रताप सिंह उर्फ रामू को गिरफ्तार कर लिया गया है जो स्थानीय निवासी है और पहले इसी संयंत्र में वेंडर के तौर पर काम करता था।
अधिकारियों ने बताया कि गुप्ता ने हाल में कुछ कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था और उन वेंडरों को कालीसूची में डाल दिया था जिनका काम संतोषजनक नहीं था। प्रताप सिंह भी उन लोगों में शामिल था जिन्हें हटाया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि नौकरी से निकाले जाने के बाद से प्रताप सिंह महाप्रबधंकर से नाराज़ चल रहा था और उसने कई बार उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी। उसने एक बार गुप्ता की कार पर हमला भी किया था, जिसके बाद दातागंज थाने में उसके खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया था।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, प्रताप सिंह बृहस्पतिवार दोपहर करीब दो बजे फैक्टरी आया और सुरक्षा गेट पार करके उस कॉन्फ्रेंस रूम में घुसने में कामयाब हो गया, जहां गुप्ता मौजूद थे। आरोप है कि उसने गुप्ता पर गोली चला दी और जब मिश्रा ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उसे भी गोली मार दी गई। अधिकारियों ने बताया कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
एचपीसीएल के क्षेत्रीय प्रबंधक (बरेली) देवानंद ने बताया कि गुप्ता द्वारा पहले दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, पहली बड़ी घटना 13 जनवरी को हुई थी। उस दिन आरोपी कथित तौर पर जबरदस्ती एक ठेकेदार की कार में घुसकर एचपीसीएल प्लांट परिसर में दाखिल हो गया था। इसके बाद वह सीधे कॉन्फ्रेंस रूम में गया, जहां उस समय अधिकारी एक मीटिंग कर रहे थे।
इस बीच, आंवला लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की हत्या की सीबीआई जांच की मांग की है। कश्यप ने शनिवार को कहा कि यह घटना बेहद गंभीर है और कई ऐसे सवाल खड़े करती है जिनके जवाब मिलना ज़रूरी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्टरी में तैनात कुछ सुरक्षाकर्मियों के कथित तौर पर आरोपी के परिवार से संबंध हैं—यह एक ऐसा मामला है जिसकी जांच भी होनी चाहिए।
कश्यप ने कहा कि इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका की जांच भी ज़रूरी है, ताकि यह साफ हो सके कि पहले से शिकायतें मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कश्यप ने कहा, ‘‘मामले की गंभीरता को देखते हुए, सीबीआई जांच की जानी चाहिए ताकि घटनाओं के पूरे क्रम की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।’
भाषा सं आनन्द
राजकुमार
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