सेवा से जुड़े विवाद में तीसरे पक्ष को विशेष अपील का अधिकार नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

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सेवा से जुड़े विवाद में तीसरे पक्ष को विशेष अपील का अधिकार नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

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  • Publish Date - March 21, 2026 / 07:43 PM IST,
    Updated On - March 21, 2026 / 07:43 PM IST

लखनऊ, 21 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कहा कि सेवा से जुड़े विवादों में महज आशंका या परोक्ष प्रभाव के आधार पर तीसरे पक्ष को विशेष अपील दायर करने का कोई अधिकार नहीं है।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल वही व्यक्ति जो वास्तव में पीड़ित है और जिसके कानूनी अधिकार सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं, इस तरह की अपील दायर कर सकता है।

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने नीरज कुमार सिंह नाम के व्यक्ति द्वारा दायर विशेष अपील खारिज करते हुए शुक्रवार को यह निर्णय दिया।

केजीएमयू के एक कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया गया था लेकिन उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कर्मचारी द्वारा दायर रिट याचिका पर उसकी बर्खास्तगी रद्द करते हुए उसे बहाल करने का आदेश दिया था।

अपीलकर्ता नीरज कुमार ने एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ एक विशेष अपील दायर की और दलील दी कि यह बहाली नियमों के विपरीत है और उसकी प्रोन्नति की संभावना प्रभावित होगी।

अदालत ने कहा कि सेवा से जुड़े विवाद नियोक्ता और संबंधित कर्मचारी के बीच होते हैं और तीसरा पक्ष तभी हस्तक्षेप कर सकता है, जब उसका कानूनी अधिकार प्रत्यक्ष या मूर्त रूप से प्रभावित हों।

अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता ना तो मूल मुकदमे में पक्षकार है और ना ही यह साबित करने में समर्थ है कि उसे कानूनी तौर पर नुकसान हो रहा है इसलिए, उसे कानून की नजर में पीड़ित व्यक्ति के तौर वर्गीकृत नहीं किया जा सकता।

भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र

जितेंद्र