मुंबई, 15 जून (भाषा) मुंबई पुलिस ने मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल और उनके परिवार को धमकी भरे पत्र भेजने के आरोप में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। ये धमकियां दाऊदी बोहरा समुदाय के उत्तराधिकार विवाद में वर्ष 2024 में न्यायमूर्ति पटेल द्वारा दिए गए फैसले से जुड़ी हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्होंने रविवार को मुंबई के गामदेवी पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी।
एक अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3) और 351(4) के तहत आपराधिक धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
शिकायत के मुताबिक, न्यायमूर्ति गौतम पटेल और उनके परिवार को पिछले 10 महीनों में कई गुमनाम धमकी भरे पत्र मिले हैं। पांच जून को यह मामला और गंभीर हो गया, जब उनकी बेटी के लंदन स्थित घर पर जर्मनी से भेजा गया एक धमकी वाला पत्र पहुंचा।
शिकायत के मुताबिक, उस पत्र में न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार की जान को खतरा होने की चेतावनी दी गई थी। शिकायत के मुताबिक, पत्र में यह भी दावा किया गया था कि परिवार के खिलाफ ‘सुपारी’ दी गई है। साथ ही, उसमें एक डिजिटल स्टोरेज डिवाइस भी शामिल थी, जिसे अब लंदन पुलिस को सौंप दिया गया है।
शिकायत के अनुसार, पत्र भेजने वालों ने न्यायमूर्ति पटेल से यूट्यूब पर एक वीडियो जारी करके यह कहने की मांग की थी कि उन्होंने सैयदना (समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख की उपाधि) से संबंधित मामले में फैसला “दबाव और मजबूरी” में दिया था।
शिकायत के मुताबिक, इसी तरह के धमकी भरे पत्र मुंबई में न्यायमूर्ति पटेल के घर पर भी भेजे गए थे, जिन्हें उनकी पत्नी ने प्राप्त किया था।
पिछले हफ्ते, लंदन पुलिस ने न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की। यह कदम तब उठाया गया जब भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ब्रिटेन के आधिकारिक दौरे पर थे और उन्होंने भारतीय उच्चायुक्त पी. कुमारन के साथ इस मामले को उठाया था।
इसके बाद उच्चायुक्त ने आश्वासन दिया कि वह इस मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाएंगे, ताकि पूर्व न्यायाधीश और उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
चौबीस अप्रैल 2024 को न्यायमूर्ति पटेल की एकल पीठ ने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें दाई-अल-मुतलक (धार्मिक प्रमुख) के रूप में मान्यता देते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि उनकी ‘नास’ (उत्तराधिकार की नियुक्ति) वैध थी।
भाषा तान्या अमित
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