अब समाज में जातीय व्यवस्था फैलाने का एक माध्यम बन गया है समाजवाद : मुख्यमंत्री योगी

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अब समाज में जातीय व्यवस्था फैलाने का एक माध्यम बन गया है समाजवाद : मुख्यमंत्री योगी

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  • Publish Date - February 13, 2026 / 09:20 PM IST,
    Updated On - February 13, 2026 / 09:20 PM IST

लखनऊ, 13 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को कहा कि जो समाजवाद कभी त्याग, संघर्ष व नैतिक आदर्श का आह्वान करता था आज वह वंशवाद, सुविधावाद और निजी साम्राज्य खड़े करने की एक सीढ़ी व समाज में जातीय व्यवस्था फैलाने का एक माध्यम बन गया है।

योगी ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए सपा पर तंज कसते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का विकास से कोई वास्ता नहीं है।

उन्होंने कहा कि गोमती रिवर फ्रंट की अनुमानित लागत 300 करोड रुपए थी लेकिन इस पर 1400 करोड रुपए खर्च हो गए फिर भी परियोजना अधूरा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र की अनुमानित लागत 200 करोड़ रुपये थी लेकिन उस पर 800 करोड रुपए खर्च हो गए फिर भी परियोजना अधूरी है, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे में जमीन नहीं ली गई लेकिन निविदा जारी कर दी गयीं। यह है सपा का विकास मॉडल?”

योगी ने कहा, “कभी जेपी (जय प्रकाश नारायण) और लोहिया समाजवाद के आदर्श माने जाते थे। इन्होंने देश में बराबरी और सामाजिक न्याय की वकालत की थी। यह दोनों महान नेता थे। आज समाजवाद संपत्ति और संतति का प्रतीक बन गया है। लोहिया इसके विरोधी थे।”

उन्होंने कहा, “जो समाजवाद त्याग, संघर्ष और नैतिक आदर्श का आह्वान करता था, आज वह इन लोगों के लिये वंशवाद का, सुविधावाद का और निजी साम्राज्य खड़े करने की एक सीढ़ी बन गया है। जहां कभी लोहिया और जयप्रकाश नारायण की परंपरा ने शोषण के विरुद्ध संघर्ष का उद्घोष किया था, आज वही समाजवाद समाज में जातीय व्यवस्था फैलाने का एक माध्यम बन गया है।”

योगी ने कहा कि जातीय वैमनस्य समाज और देश के हित में नहीं है।

मुख्यमंत्री ने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान अहिल्याबाई की मूर्ति कथित रूप से तोड़े जाने को लेकर उठे विवाद के बीच कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने मुगल काल खंड में भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रतीकों को जिस दमदार तरीके से स्थापित किया था उस हिसाब से तो उनकी पूजा होनी चाहिये।”

भाषा सलीम जितेंद्र

जितेंद्र