‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ छह महीने की तैयारी में संभव: जेपीसी अध्यक्ष पी.पी. चौधरी
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ छह महीने की तैयारी में संभव: जेपीसी अध्यक्ष पी.पी. चौधरी
लखनऊ, 15 जुलाई (भाषा) ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने बुधवार को कहा कि निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत दिया है कि यदि उसे छह महीने पहले सूचना दी जाए तो वह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने में सक्षम है।
जेपीसी ने लखनऊ में शिक्षाविदों, संविधान विशेषज्ञों, पद्म पुरस्कार विजेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और मीडिया जगत की हस्तियों के साथ विचार-विमर्श के बाद अपनी तीन दिवसीय बैठक बुधवार को संपन्न की।
एक सवाल के जवाब में चौधरी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के लिए प्रस्तावित संविधान संशोधनों पर अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले समिति निर्वाचन आयोग का पक्ष भी सुनेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हम निर्वाचन आयोग से जानेंगे कि वह किस प्रकार ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लागू करने की योजना बना रहा है। हम उनसे सवाल पूछेंगे और उनकी राय सुनने के बाद ही समिति यह सिफारिश करेगी कि यह व्यवस्था व्यावहारिक है या नहीं।’’
निर्वाचन आयोग की प्रारंभिक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए चौधरी ने कहा, ‘‘आयोग ने संकेत दिया है कि यदि उसे छह महीने पहले सूचना दी जाए तो देशभर में एक साथ चुनाव कराना संभव होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग का मानना है कि यदि संसद 2028 में संबंधित कानून पारित कर देती है, तो वर्ष 2029 से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लागू किया जा सकता है।’’
चौधरी ने कहा कि 1954 से 1960 के बीच देश में मतपत्रों के माध्यम से लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए गए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने मतदाताओं को कम नहीं आंक सकते। वे राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और यह तय करने में सक्षम हैं कि किसे वोट देना है। यही वजह है कि दुनिया में भारत के लोकतंत्र की अलग पहचान है।’’
जेपीसी अध्यक्ष ने यह भी कहा कि बैठक में शामिल संविधान विशेषज्ञों की राय थी कि यह प्रस्ताव संविधान के मूल ढांचे, संघीय व्यवस्था या लोकतंत्र का उल्लंघन नहीं करता।
विशेषज्ञों के हवाले से उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का एक समयबद्ध कार्यक्रम है। इससे राज्यों की शक्तियों या अधिकारों में कोई कमी नहीं आती।’’
प्रस्ताव के पक्ष में व्यापक जनसमर्थन का दावा करते हुए चौधरी ने कहा, ‘‘नागरिक समाज के लगभग 99 प्रतिशत प्रतिनिधि और आम लोग ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के पक्ष में हैं। यह जनता की इच्छा है।’’
उन्होंने कहा कि विभिन्न पक्षों ने समिति को बताया कि बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है, क्योंकि अधिकारियों को अलग-अलग राज्यों में बार-बार चुनावी ड्यूटी के लिए भेजना पड़ता है।
लखनऊ में आयोजित जेपीसी की तीन दिवसीय विचार-विमर्श बैठक के अंतिम दिन समिति ने प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों, निदेशकों, विधि एवं राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञों तथा विभिन्न विभागों के प्रमुखों से विस्तार से चर्चा कर उनके सुझाव प्राप्त किए।
बयान के अनुसार, बैठक के दौरान शिक्षाविदों ने प्रस्तावित विधेयकों के लगभग सभी प्रमुख प्रावधानों पर अपने विचार रखे।
अधिकारियों के मुताबिक, बैठक में केंद्र-राज्य संबंध, मध्यावधि चुनावों की स्थिति, शेष कार्यकाल, एक साथ चुनाव की व्यवस्था की स्थिरता और दीर्घकालिक व्यवहार्यता, निर्वाचन आयोग को प्रस्तावित शक्तियां तथा चुनावी सुधारों से जुड़े विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
भाषा सलीम खारी
खारी

Facebook


