संवैधानिक संस्था में सामान्य नागरिक का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत : आदित्यनाथ

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संवैधानिक संस्था में सामान्य नागरिक का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत : आदित्यनाथ

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  • Publish Date - September 14, 2026 / 02:58 PM IST,
    Updated On - September 14, 2026 / 02:58 PM IST

लखनऊ, 14 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि किसी संवैधानिक संस्था में सामान्य नागरिक का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होता है और अगर जनता का विश्वास नहीं है तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में लोकायुक्त संगठन के स्थापना की स्वर्ण जयंती के कार्यक्रम के अवसर पर अपने सम्बोधन में यह भी कहा कि लोकायुक्त जैसी संस्थाओं के जरिये मिले अधिकारों का दुरुपयोग ना हो, इसलिये अनावश्यक शिकायतें करने वाले लोगों पर मजबूती से ‘शिकंजा’ कसने का काम भी होना चाहिए।

आदित्यनाथ ने 14 सितंबर 1977 को उत्तर प्रदेश में न्यायमूर्ति विशंभर दयाल के नेतृत्व में गठित हुए और वर्तमान में न्यायमूर्ति संजय मिश्र की अगुवाई में कार्यरत लोकायुक्त संगठन के 50 वर्ष पूरे होने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था में एक सामान्य नागरिक का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है और जो संस्था आमजन के विश्वास पर खरी उतरेगी, लोकतंत्र में उस संस्था को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता।

उन्होंने कहा, ”लेकिन यह प्रश्न भी हमारे सामने सदैव बना रहता है।”

आदित्यनाथ ने कहा, ”मेरा मानना है कि सुशासन तो जन विश्वाास पर निर्भर करता है। अगर जनता का विश्वास नहीं है तो हम सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते। सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी हमारी विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं पर इस विश्वास के साथ गौरव की अनुभूति कर सके।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के संविधान के हिसाब से न्याय, सत्य और समता मौलिक आवश्यकता है, जिसमें हर व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है।

हालांकि मुख्यमंत्री ने फर्जी शिकायतें किये जाने की समस्या का भी जिक्र करते हुए इस पर शिकंजा कसने की जरूरत बतायी।

उन्होंने कहा कि एक बार एक व्यक्ति ने उनसे एक विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायत की, मगर जांच में वह झूठी साबित हुई, जिसके बाद उस व्यक्ति ने मांग की कि वह एक और शिकायत दे रहा है और उसके आधार पर पूरे जिले में विद्यालयों की जांच करा ली जाए।

आदित्यनाथ ने कहा, ”मैंने उससे कहा कि अगर कोई विशिष्ट शिकायत हो तो बताइये। सिस्टम के पास इतना समय नहीं होता है। आप अनावश्यक रूप से सिस्टम को खराब कर रहे हैं और न्याय पाने के अभिलाषी ईमानदार व्यक्ति के समय को खराब करने का काम कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि यह अक्सर होता है और संस्थाओं के जरिये मिले अधिकारों का कहीं दुरुपयोग ना हो, इसलिये अनावश्यक शिकायत के आधार पर समय नष्ट करने वाले लोगों पर मजबूती के साथ ‘शिकंजा’ कसने का काम होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लोकायुक्त संगठन द्वारा अपनी कार्यप्रणाली में तकनीक का बेहतर इस्तेमाल किये जाने की सराहना करते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार को रोकने के लिये ई—पॉज मशीनों के इस्तेमाल का जिक्र किया और कहा कि पहले जहां उनके ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रमों में 100 में से 60 शिकायत सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बेईमानी की आती थीं, वे ई—पॉज मशीनों की व्यवस्था लागू होने के बाद शून्य हो गयी हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में राजस्व विभाग में नामांतरण और विरासत से जुड़े करीब 34 लाख मामले लंबित थे और पिछले साढ़े नौ वर्षों के उनके कार्यकाल में इनका समाधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त संस्था की प्रासंगिकता का जिक्र करते हुए कहा कि देश में लगातार लोकपाल की स्थापना की मांग को लेकर आंदोलन चले थे या लोकायुक्त जैसी संस्थाओं को विकसित करने के लिए जो कार्य प्रारंभ हुए थे वे उस समय की आवश्यकता भी थी और आज के आधार पर भी वह मानते हैं कि आज भी उसकी जरूरत है।

उन्होंने किसी का नाम लिये बगैर कहा, ”अक्सर होता है कि जब व्यक्ति को ताकत मिलती है तो वह उच्छृंखल व्यवहार करने लगता है, इसलिये आवश्यक है कि उस पर कहीं से एक अंकुश तो हो।”

आदित्यनाथ ने कहा कि आजादी के तत्काल बाद हो सकता है यह चीज लोगों को नहीं पता होगी कि आने वाले समय में इस प्रकार की शिकायतें आएंगे कि नेतृत्व देने वाले लोग ही भ्रष्टाचार में लिप्त होकर उस व्यवस्था में ‘गदर’ मचा डालेंगे और तब देश में 1975 में आपातकाल लागू होने के बाद बनी सरकार ने लोकायुक्त संगठन के गठन की दिशा में कदम बढ़ाए थे और 14 सितंबर 1977 को उत्तर प्रदेश में भी लोकायुक्त संस्था गठित हुई थी।

भाषा सलीम मनीषा रंजन

रंजन