राम गोविंद चौधरी सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में जीवनभर संघर्षरत रहे : अखिलेश यादव
राम गोविंद चौधरी सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में जीवनभर संघर्षरत रहे : अखिलेश यादव
लखनऊ, 26 सितंबर (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को विधानसभा के आठ बार सदस्य रहे दिवंगत राम गोविंद चौधरी को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में जीवन भर संघर्षरत रहे और उन्होंने जनपक्ष को हमेशा सबसे पहले और ऊपर रखा।
सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता विरोधी दल (2017-2022) राम गोविंद चौधरी के निधन पर पार्टी प्रदेश मुख्यालय में शनिवार को एक शोक सभा हुई। यादव ने चौधरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
सपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ स्थित संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह करीब 74 वर्ष के थे।
सपा के मुख्य प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने बताया कि आज पार्टी प्रदेश मुख्यालय में दिवंगत नेता के लिए शोक प्रस्ताव रखा गया। उपस्थित सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं ने रामगोविन्द चौधरी के निधन पर गहरा शोक जताते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
पार्टी की ओर से जारी एक बयान के अनुसार इस मौके पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, ‘‘अब हमारे बीच महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ राम गोविंद चौधरी जी नहीं रहे, जिन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजवादी मार्गदर्शक जय प्रकाश नारायण जी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की अगुवाई में समाजवादी मूल्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों की मशाल सदैव प्रज्वलित रखी।’’
यादव ने उनके कार्यों को स्मरण करते हुए कहा कि बलिया की क्रांतिकारी धरती से उठकर छात्र राजनीति के कठिन मार्ग से होते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक उनकी आवाज और अकाट्य तर्कों का सदैव सम्मान हुआ।
सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने तब भी अपनी आवाज बुलंद रखी जब सदन में हमारे 50 विधायक भी नहीं थे। जब वह बोलते थे तो सदन उन्हें बड़ी शांति और शिद्दत के साथ सुनता था ।’’
बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक गांव में नौ जुलाई 1953 को जन्मे राम गोविंद चौधरी ने इसी जिले की चिलकहर और बांसडीह सीट का 1977 से 2022 के बीच विधानसभा में आठ बार प्रतिनिधित्व किया। वह मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व की सरकारों में मंत्री भी रहे।
इसके पहले 1972 में वह बलिया के टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री और 1974 में अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और जनपद छात्र युवा वाहिनी के सह-संयोजक रहे।
भाषा आनन्द
राजकुमार
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