लखनऊ, पांच मई (भाषा) आस्था के पर्व ‘बड़े मंगल’ पर ‘वाटर वूमेन’ के नाम से प्रसिद्ध शिप्रा पाठक ने 55 हजार हरे पत्तलों का निःशुल्क वितरण किये।
उनका यह अभियान न केवल धार्मिक आयोजनों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि आम लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का प्रभावी माध्यम भी बना।
बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल) ज्येष्ठ माह के सभी मंगलवारों को मनाया जाने वाला एक हिंदू पर्व है, जो मुख्य रूप से भगवान ‘हनुमान जी’ को समर्पित है।
एक बयान के मुताबिक ‘बड़े मंगल’ के अवसर पर यहां हर वर्ष बड़े पैमाने पर भंडारों का आयोजन होता है। उनमें बड़ी मात्रा में प्लास्टिक के दोने और पत्तलों का उपयोग होता है, जो बाद में कचरे के रूप में शहर और जलस्रोतों को प्रदूषित करते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए पाठक ने यह अभिनव पहल शुरू की।
उन्होंने अपनी संस्था ‘पंचतत्व’ के सदस्यों के साथ प्रेस क्लब, दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर, हजरतगंज, इंदिरानगर, गोमती नगर और हनुमान सेतु समेत यहां कई स्थानों पर आयोजित भंडारों में पहुंचकर आयोजकों और श्रद्धालुओं को हरे पत्तल वितरित किए।
पाठक ने लोगों से कहा कि प्लास्टिक की पत्तलों में गर्म भोजन परोसने से हानिकारक रसायन निकलते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होते हैं।
उन्होंने चेताया कि यही प्लास्टिक कचरे के रूप में नालियों और नदियों में पहुंचकर जल प्रदूषण का कारण बनता है।
विशेष रूप से उन्होंने गोमती नदी का जिक्र करते हुए कहा, “यदि हम अभी नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ जल मिलना कठिन हो जाएगा।”
इस अभियान की शुरुआत उन्होंने लखनऊ प्रेस क्लब से की। उन्होंने कहा कि मीडिया के सहयोग से यह संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकता है और लोगों की सोच में बदलाव लाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि हर मंगलवार को इसी प्रकार निःशुल्क हरे दोना-पत्तल का वितरण किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति या संस्था इस अभियान में भाग लेना चाहती है, वह उनसे संपर्क कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हरे पत्तल पूरी तरह जैविक होते हैं और आसानी से नष्ट हो जाते हैं, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इसके विपरीत, प्लास्टिक कचरा लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है और भूमि तथा जल दोनों को प्रदूषित करता है।
भाषा सं जफर रंजन राजकुमार
राजकुमार