शिवपाल ने माघ मेला विवाद पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बयान पर तंज कसा

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शिवपाल ने माघ मेला विवाद पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बयान पर तंज कसा

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  • Publish Date - February 18, 2026 / 10:14 PM IST,
    Updated On - February 18, 2026 / 10:14 PM IST

लखनऊ, 18 फरवरी (भाषा) समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान पुजारी की ‘‘चोटी’’ कथित रूप से खींचे जाने की घटना पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की टिप्पणी को लेकर उन पर कटाक्ष करते हुए बुधवार को कहा कि यदि उन्हें इस मुद्दे पर इतनी आपत्ति है तो इस्तीफा दे देना चाहिए।

यह बयान प्रयागराज में माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ी घटना को लेकर जारी विवाद के बीच आया है।

पाठक ने मंगलवार को मीडिया से कहा था कि किसी की ‘‘चोटी’’ खींचना ‘‘गंभीर पाप’’ है और जो ऐसा करते हैं उन्हें पाप लगता है। उनकी इस टिप्पणी पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

बुधवार को लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में यादव ने कहा कि पाठक उसी सरकार और मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर उन्हें इस घटना से इतना बुरा लगा है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्हें भी पाप लगेगा क्योंकि वह उसी कैबिनेट के सदस्य हैं। अपमान उसी सरकार के तहत हुआ।’’

विवाद 18 जनवरी की उस घटना से जुड़ा है जब मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान के लिए पालकी से संगम की ओर जाते समय पुलिस ने रोक दिया था।

अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया था कि उन्हें डुबकी लगाने से रोका गया और उनके साथ आए बटुक ब्राह्मणों की चोटी खींची गई। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए तस्वीरें भी दिखाईं और दावा किया कि यह घटना वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई।

हालांकि, आयुक्त समेत जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कहा था कि संत लगभग 200 अनुयायियों के साथ रथ पर उस समय संगम पहुंचे थे जब रात एक बजे से सुबह 10 बजे के बीच भारी भीड़ और कोहरे के कारण ऐसी आवाजाही जोखिम भरी थी।

इससे पहले 13 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा था कि हर कोई ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का उपयोग नहीं कर सकता और यह पद उचित धार्मिक प्रक्रिया व मान्यता से ही दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और कोई भी उससे ऊपर नहीं, यहां तक कि मुख्यमंत्री भी नहीं।

रविवार को अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन पर शंकराचार्य का अपमान करने का आरोप लगाया था।

बिना नाम लिए उन्होंने कहा, ‘‘हम शंकराचार्य जी के साथ खड़े हैं।’’ यादव ने दावा किया कि परंपराओं पर सवाल उठाकर दूसरों से ‘‘प्रमाणपत्र’’ मांगे जा रहे हैं।

माघ मेला प्रकरण के बाद से राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।

भाषा चंदन जफर खारी

खारी