मदरसा आधुनिकीकरण संबंधी समिति की सिफारिशों के लिए खत्म नहीं हो रहा इंतजार

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मदरसा आधुनिकीकरण संबंधी समिति की सिफारिशों के लिए खत्म नहीं हो रहा इंतजार

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  • Publish Date - July 5, 2026 / 02:51 PM IST,
    Updated On - July 5, 2026 / 02:51 PM IST

(मुहम्मद मजहर सलीम)

लखनऊ, पांच जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की मदरसा सुधार एवं आधुनिकीकरण परियोजना की सबसे अहम कड़ी मानी जाने वाली समिति की सिफारिशों के लिए इंतजार एक साल से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी खत्म नहीं हो सका है।

मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम और मदरसों के संचालन संबंधी नियमावली में संशोधन जैसे व्यापक परिवर्तनकारी फैसले काफी हद तक इसी समिति की सिफारिशों पर निर्भर करेंगे।

हालांकि, सरकार कह रही है कि समिति की रिपोर्ट जल्द सामने आएगी, लेकिन समय के बारे में कोई भी स्पष्टता नहीं है।

पिछले साल 30 मई को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में छह सदस्यीय एक समिति गठित की गई थी। इस समिति को 30 जून तक अपनी रिपोर्ट देनी थी लेकिन इस काम की व्यापकता को देखते हुए इसका कार्यकाल तीन महीने यानी अगस्त 2025 तक के लिए बढ़ा दिया गया था। इसके बाद से लगभग 10 महीने गुजर जाने के बावजूद अभी इसकी रिपोर्ट का इंतजार बाकी है।

उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि समिति की रिपोर्ट ‘‘बहुत जल्द’’ सामने आएगी। हालांकि, उन्होंने कोई समयसीमा नहीं बताई।

अंसारी ने कहा कि उन्होंने सोमवार को समिति की बैठक बुलाई है, जिसमें रिपोर्ट को अंतिम रूप देने तथा कई अन्य पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

समिति की रिपोर्ट आने में विलंब संबंधी सवाल पर राज्य मंत्री ने कहा कि यह कार्य बहुत बड़ा और व्यापक है, लिहाजा इसमें ज्यादा समय लग गया है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में मदरसों का कार्य संचालन किस तरह से होगा, उसमें इस समिति की सिफारिशों का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव चंद महीने ही दूर है। ऐसे में संबंधित समिति की रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आने से मदरसा शिक्षकों के संगठन में निराशा व्याप्त है।

मदरसा शिक्षकों के संगठन टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया उत्तर प्रदेश के महासचिव दीवान साहब ज़मां खां ने कहा कि सरकार द्वारा मदरसा सुधार एवं आधुनिकीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर गठित समिति की रिपोर्ट अभी तक नहीं आना निराशाजनक है।

खां ने कहा कि अभी पिछले हफ्ते यह सुनने में आ रहा था कि समिति की रिपोर्ट को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

उन्होंने समिति की सिफारिशें जल्द सार्वजनिक करके लागू किए जाने की मांग की और उम्मीद जताई कि यह समिति वर्ष 2016 में बनाई गई मदरसा नियमावली में व्याप्त खामियों को दूर करेगी।

खां ने कहा कि वर्ष 2016 में बनाई गई नियमावली में अनुदानित मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति, उनके निलंबन, बर्खास्तगी और इस्तीफे तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं दिए गए थे और यह काम मदरसों की प्रबंध समिति पर डाल दिया गया था, तथा उनसे कहा गया था कि वह यह नियम-कायदे बनाए और उन्हें राज्य मदरसा शिक्षा परिषद से अनुमोदित कराए।

उन्होंने कहा कि राज्य के 561 में से लगभग आधे अनुदानित मदरसों ने ही यह अनुमोदन कराया था जबकि बाकी मदरसों में इन महत्वपूर्ण विषयों को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट नियम-कायदे लागू नहीं हैं।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इस बारे में कहा कि मदरसों के लिहाज से इतनी महत्वपूर्ण समिति की सिफारिशें अगर समय से दे दी जातीं तो मदरसा शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकता था।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि अब भी वक्त है। समिति जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट दे और उसकी सिफारिशों को फौरन लागू किया जाए।’’

राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि समिति की सिफारिशों पर मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम 2004 और उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी एवं फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन और सेवा नियमावली 2016 में जरूरी संशोधन किए जाने हैं।

उन्होंने बताया कि यह समिति प्रदेश के अनुदानित मदरसों में नौ से 12 तक की कक्षाओं के लिए विषयों और पाठ्यक्रम के पुनर्निर्धारण से संबंधित सिफारिशें देगी।

अधिकारियों के अनुसार, समिति मदरसों में छात्रों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नए शिक्षकों की चयन प्रक्रिया, उनके निलंबन बर्खास्तगी और तबादले के लिए नीति निर्धारण तथा छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर विषयवार शिक्षकों का समायोजन करने संबंधी सिफारिशें भी करेगी। मदरसों में कार्यरत शिक्षकों की विषयवार योग्यता को चिह्नित कर उनका प्रशिक्षण और ब्रिज कोर्स कराकर उन्हें आधुनिक विषयों से जोड़ने तथा मदरसों की मान्यता की शर्तों का फिर से निर्धारण करने के संबंध में भी यह समिति सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में करीब 25,000 मदरसे हैं जिनमें से लगभग 13000 मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त हैं। इनमें से 561 को सरकार से अनुदान प्राप्त होता है। बाकी मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं।

भाषा सलीम मनीष रंजन नेत्रपाल

नेत्रपाल