पश्चिम एशिया युद्ध के कारण आगरा के संगमरमर हस्तशिल्प कारोबार पर संकट के बदल छाये

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पश्चिम एशिया युद्ध के कारण आगरा के संगमरमर हस्तशिल्प कारोबार पर संकट के बदल छाये

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 04:20 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 04:20 PM IST

आगरा (उप्र) 16 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से आगरा का संगमरमर हस्तशिल्प कारोबार पर प्रभावित हुआ है, जिसकी वजह से पच्चीकारी का काम ठप होने के कगार पर है।

काम की कमी के कारण कारखाने बंद हो गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कारीगरों को काम मिलना बंद हो गया है।

संगमरमर हस्तशिल्प व्यापारी अदनान शेख ने बताया कि संगमरमर की जड़ाई के इस जटिल काम के मुख्य ग्राहक पश्चिम एशियाई देशों के कारोबारी हैं।

अदनान शेख ने कहा कि ताजमहल में दिखने वाली पच्चीकारी बेहद आकर्षक है, उसी तरह से संगमरमर में भी पच्चीकारी की जाती है।

शेख ने कहा कि इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के मद्देनजर पश्चिम एशिया के देश ही सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं लिहाजा उन देशों से काम मिलना पूरी तरह से बंद हो गया है।

उन्होंने कहा कि कुछ पुराने ऑर्डर थे, जिन्हें ग्राहकों ने फिलहाल रोकने के लिए बोला है।

शेख ने कहा कि खाड़ी देशों में कई बड़े व्यापारी भी आगरा से संगमरमर पर पच्चीकारी किया हुआ सामान मांगते हैं, उन्होंने भी फिलहाल व्यापार रोक दिया है।

उन्होंने कहा कि युद्ध के शुरू होते ही खाड़ी देशों में पच्चीकारी का सामान निर्यात नहीं हो रहा।

ताजमहल पूर्वी गेट व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष आयुष गुप्ता ने बताया कि आगरा के संगमरमर पच्चीकारी के काम से करीब 35 हजार कारीगर जुड़े हैं।

उन्होंने बताया कि आगरा में ताजमहल निर्माण के बाद पच्चीकारी का काम सैकड़ों साल से पीढ़ी दर पीढ़ी और परंपरागत तरीके से होता रहा है और कई परिवार ऐसे हैं जिनकी कई पीढ़ियां पच्चीकारी का काम करती आ रही हैं।

गुप्ता ने कहा कि हर साल करोड़ों रुपये का माल निर्यात होता है जिसमें सबसे ज्यादा माल खाड़ी के देशों में जाता है।

उन्होंने कहा कि हालांकि युद्ध के कारण व्यापार के हालात बेहद खराब हैं और फैक्ट्रियां बंद होने के कारण, अपने घरों में काम करने वाले कारीगरों को भी काम नहीं मिल पा रहा है।

गुप्ता ने कहा कि कारीगरों के सामने रोजी रोटी का संकट भी पैदा होने लगा है।

उन्होंने कहा कि जब तक पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी रहेगा, यह व्यापार ठप रहने की आशंका है।

गुप्ता ने दावा किया कि पिछले साल लगभग 700 करोड़ रुपये की हस्तशिल्प सामग्री का निर्यात हुआ था।

भाषा सं आनन्द जोहेब

जोहेब