उप्र: अदालत ने 65 साल बाद भी अधिग्रहित जमीन का पूरा मुआवजा नहीं देने पर जतायी नाराजगी

उप्र: अदालत ने 65 साल बाद भी अधिग्रहित जमीन का पूरा मुआवजा नहीं देने पर जतायी नाराजगी

उप्र: अदालत ने 65 साल बाद भी अधिग्रहित जमीन का पूरा मुआवजा नहीं देने पर जतायी नाराजगी
Modified Date: September 28, 2026 / 09:19 pm IST
Published Date: September 28, 2026 9:19 pm IST

लखनऊ, 28 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 65 साल पहले अधिग्रहित की गई जमीन का पूरा मुआवजा नहीं दिए जाने को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।

अदालत ने लखनऊ के अपर जिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण) और मुख्य कोषागार अधिकारी को छह अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने तथा यह बताने का निर्देश दिया कि ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण’ के आदेशों का पालन नहीं करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने सोमवार को राज कुमार शैलेंद्र सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया।

अदालत ने गौर किया कि जमीन अधिग्रहण की मूल कार्यवाही करीब 65 साल पहले, वर्ष 1959 में की गई थी, जबकि मुआवजे की वसूली के लिए कार्यवाही वर्ष 2019 तक लंबित रही, इसके बावजूद याचिकाकर्ता को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला। कानूनी कार्यवाही पूरी होने के बावजूद याचिकाकर्ता को अब तक मुआवजे के तौर पर केवल 11.72 लाख रुपये मिले हैं।

‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण’ के अनुसार, अगस्त 2025 तक याचिकाकर्ता को 38,25,567.67 रुपये का भुगतान किया जाना था।

याचिकाकर्ता के वकील अमित जायसवाल ने कहा कि बकाया राशि पर 15 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देय है।

पीठ ने पाया कि प्राधिकरण द्वारा पारित कई आदेशों का पालन नहीं किया गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए छह अक्टूबर की तारीख तय करते हुए अपर जिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण) और मुख्य कोषागार अधिकारी को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

दोनों अधिकारियों को आदेशों का पालन नहीं किए जाने के कारण और उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए, इस पर स्पष्टीकरण देने को कहा गया।

भाषा सं. सलीम जितेंद्र

जितेंद्र


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