उप्र: नकली दवा के कारोबार का पर्दाफाश, दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

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उप्र: नकली दवा के कारोबार का पर्दाफाश, दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

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  • Publish Date - September 26, 2026 / 08:54 PM IST,
    Updated On - September 26, 2026 / 08:54 PM IST

लखनऊ, 26 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने नकली ‘लिपाग्लिन’ दवा के कारोबार का खुलासा करते हुए दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। बयान के अनुसार, नकली दवा लिपाग्लिन (बैच नंबर आईबी00327ए) की खरीद-बिक्री और फर्जी बिलिंग के मामले में औषधि विभाग ने जांच के आधार पर सर्वेश सिंह उर्फ मुन्ना भाई और राजस्थान की फर्म मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोस के संचालक दुर्गेश कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अमीनाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी।

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) (नार्थ जोन) गाजियाबाद और राजस्थान के औषधि नियंत्रण अधिकारियों की संयुक्त जांच में यह मामला सामने आया।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में पाया गया कि नकली ‘लिपाग्लिन’ के 9,610 पत्ते मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोस ने गुजरात की दो फर्मों को बेची थीं।

उन्होंने बताया कि अभिलेखों में इन दवाओं की खरीद लखनऊ स्थित मेसर्स बालाजी फार्मास्युटिकल्स से कुल 11,360 पत्ते दिखाये गये थे।

अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोस के लाइसेंस प्राप्त परिसर में दवाओं का कोई भंडारण नहीं मिला।

उन्होंने बताया कि वहीं, लखनऊ स्थित मेसर्स बालाजी फार्मास्युटिकल्स के नाम से जारी औषधि लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका था और फर्म का जीएसटी पंजीकरण भी रद्द हो चुका था।

पूछताछ में मेसर्स बालाजी फार्मास्युटिकल्स के पूर्व संचालक ने इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया।

अधिकारियों ने बताया कि मेसर्स क्योरहेल्थ मेडिकोस के संचालक दुर्गेश कुमार ने वीडियो कॉल के दौरान बताया कि उसे दवाओं की आपूर्ति ‘मुन्ना भाई’ के माध्यम से हुई थी और जांच में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों का संबंध सर्वेश सिंह और अन्य लोगों से सामने आया।

बयान के अनुसार, जांच में यह भी पता चला कि इसी ‘लिपाग्लिन’ बैच के संबंध में महाराष्ट्र के ठाणे शहर में भी सर्वेश उर्फ मुन्ना सिंह समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है।

औषधि विभाग के अनुसार, निरस्त लाइसेंस के नाम का कथित रूप से इस्तेमाल कर फर्जी अभिलेख और बिल तैयार किए गए तथा नकली ट दवाओं की अवैध खरीद-बिक्री की गई।

पुलिस के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की 3(5), 276, 277, 278, 318(4), 319, 336(2) और 340(2) समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

भाषा आनन्द जितेंद्र

जितेंद्र