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नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) समुद्री परिवहन क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने गुजरात के कांडला में देश के पहले बंदरगाह आधारित ई-मेथेनॉल संयंत्र की शनिवार को आधारशिला रखी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 2,300 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (डीपीए) और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (एपीसीएल) के संयुक्त उपक्रम वाले इस हरित ईंधन संयंत्र की क्षमता 150 टन प्रतिदिन होगी। यह एशिया-यूरोप व्यापार मार्ग पर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराएगा।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत दुनिया की अग्रणी समुद्री शक्तियों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और अब वह वैश्विक जहाजों को हरित ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
सोनोवाल गुजरात के गांधीनगर से डीपीए, कांडला में देश के पहले बंदरगाह आधारित ई-मेथेनॉल संयंत्र की आधारशिला रखे जाने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाला यह संयंत्र नवीकरणीय ऊर्जा, पानी और जैविक स्रोतों से प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड (बायोजेनिक सीओ2) का उपयोग करके ई-मेथेनॉल का उत्पादन करेगा।
इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने भारत के तेल एवं पेट्रोलियम क्षेत्र में असम की ऐतिहासिक भूमिका और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य के बढ़ते योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी उपस्थित थे।
असम मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार यह परियोजना राज्य के औद्योगिक विस्तार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और उभरती हरित अर्थव्यवस्था में असम के सार्वजनिक उपक्रमों की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
भाषा यासिर पाण्डेय
पाण्डेय